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खेलोगे-कूदोगे बनोगे अफसर…!

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सीकर. खिलाडिय़ों के कॅरियर को लेकर हमेशा चिन्ता में रहने वाले अभिभावकों का मिथक अब राजस्थान में पूरी तरह टूटने लगा है। खेलोगे-कूदोगे तो बनेंगे सीधे अफसर… की नई परम्परा भी हरियाणा, पंजाब व केरल की तरह यहां भी शुरू हो चुकी है। राज्य सरकार के अन्तरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाडिय़ों को आऊट ऑफ टर्न नौकरी देने की योजना का अब तक प्रदेश के 29 खिलाडिय़ों को फायदा मिल चुका है। दूसरे चरण में सरकार ने 153 खिलाडिय़ों की भी सूची तैयार कर ली है। इनके आवेदनों की जांच के बाद विभिन्न विभागों में नियुक्ति दी जाएगी। इससे पहले खिलाडिय़ों को महज दो प्रतिशत खेल कोटे का फायदा मिल पा रहा था। इसके अलावा पिछले पांच साल में हुई विभिन्न विभागों की भर्तियों में अब दो कोटे में पद रिक्त रहने के बजाय प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।2016 से पहले पदक जीतने वालों को मिल सकता है तोहफाप्रदेश में आऊट ऑफ टर्न नौकरी देने के मामले में सरकार की कट ऑफ डेट के हिसाब से एक जनवरी 2016 से पहले पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों को सीधी नौकरी नहीं मिली थी। इस श्रेणी के प्रदेश में 22 खिलाड़ी शामिल है। इनको अभी तक नियुक्ति नहीं मिली है। खेल मंत्री अशोक चांदना का दावा है कि इन खिलाडिय़ों के आवेदनों का भी विधिक परीक्षण कराया जा रहा है। यदि विधि विभाग हरी झंडी देता है तो इन खिलाडिय़ों की नौकरी की राह भी खुल सकती है।इन खेलों के खिलाडिय़ों की खुल राहनिशानेबाजी, नौकायन, तीरन्दारजी, घुड़सवारी, कबड्डी, पेरा एथलेटिक्स, साईकिलिंग, हैण्डबॉल, तलवारबाजी, एथलेटिक्स, खो-खो, भारोत्तोलन, बास्केटबॉल, वालीबॉल, ताईक्वाण्डो, शूटिंग, वुशू, बॉक्सिंग, पेरा स्वीमिंग, रग्बी, कराटे, जिमनास्टिक, नेटबॉल सहित अन्य खेलों के खिलाडिय़ों की राह पहले व दूसरे चरण में खुली है।राजस्थान के खिलाडिय़ों मे स्पीड और स्टे्रमिना…राजस्थान के खिलाडिय़ों की अपनी पहचान है। यहां के खिलाडिय़ों में स्पीड के साथ स्टे्रमिना भी बहुत है। राजस्थान के खिलाडिय़ों ने हर खेल में खूब पदक दिलाए है। लेकिन खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन नहीं मिलने की वजह से थोड़ा मोहभंग हो रहा है। नई नियमों का फायदा युवा खिलाडिय़ों को मिल रहा है।मदन मोहन, एशिया सचिव, रस्साकस्सी फैडरेशनएक्सपर्ट व्यू: खिलाडिय़ों के प्रति समाज की बदल रही सोचदेश व प्रदेश के लिए पदक दिलाने वाले खिलाडिय़ों के प्रति समाज की सोच अब पूरी तरह बदल रही है। आऊट ऑफ टर्न नौकरी खिलाडिय़ों का हक था जो वर्षो तक कागाजों में उलझा रहा। अब खिलाडिय़ों को पूरा हक मिल रहा है। इससे राजस्थान में खेलों में माहौल बदल गया। आगामी समय में राजस्थान में नए खिलाड़ी तेजी से आएंगे।अरुण सारस्वत, महासचिव, राजस्थान ओलम्पिक संघ

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