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100 से अधिक धरोहर तोड़ी, जांच के आदेश पर भी प्रशासन मौन

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सीकर. शेखावाटी की संस्कृति के साथ सेठ साहूकारों की पहचान हवेलियां भू-माफियाओं के निशाने पर है। सरकारी नियमों को रोंधकर इनके छज्जों, गोखों और बरामदों के साथ भित्तीचित्रों पर हथौड़े चल रहे हैं। अंचल के महज सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर, और रामगढ़ शेखावाटी में ही पिछले पांच वर्ष में सौ से अधिक हवेलियों को नेस्तनाबूद कर दिया गया है। धरोहर संरक्षण को लेकर जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं और माफिया गिरोह के लोग नियमों की ढील का फायदा उठाकर आवासीय के नाम पर व्यवसायिक बहुमंजिला इमारतें बनाकर चांदी कूट रहे हैं। गत वर्ष लक्ष्मणगढ़ कस्बे में चार हवेलियां तोडऩे के मामले में पुलिस अधीक्षक तक को शिकायत दी गई, लेकिन कार्रवाई तो दूर जिम्मेदारों ने इस कारोबार को रोकने तक की हिम्मत नहीं दिखाई।
शेखावाटी में डेढ़ हजार से ज्यादा हवेलियांशेखावाटी अंचल की पहचान पुरानी कलात्मक हवेलियों के वैभव से है। सरकारी तंत्र ने कभी इन हवेलियों का अधिकृत सर्वे नहीं करवाया, लेकिन सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिले में इनकी संख्या डेढ़ हजार से ज्यादा है। इनका निर्माण काल 18वीं शताब्दी के मध्य से लेकर 19वीं शताब्दी के उतराद्र्ध का माना जाता है। यहां के प्रवासी व्यवसायियों ने इन हवेलियों का निर्माण इसलिए करवाया था कि इनका क्षेत्र से जुड़ाव के साथ आवागमन बना रहें। इन हवेलियों में सबसे खास इनके बाहर और भीतर निर्मित किए गए भित्ती चित्र है। इनकी पहचान भी इनके मालिकों के नाम से होती है।
100 से अधिक हवेलियां नेस्तनाबूदअंचल के केवल सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर और रामगढ़ शेखावाटी की स्थिति पर ही नजर डालें तो पिछले पांच वर्ष में सौ से अधिक हवेलियों को नेस्तनाबूद कर उनके स्थान पर बहुमंजिला व्यवसायिक इमारतें बना दी गई है। जिम्मेदार विभाग से जुड़े अधिकारी बताते हैं पिछली सरकार के दौरान इन हवेलियों के संरक्षण के निर्देश दिए थे। इसके तहत हवेलियों के रजिस्टर्ड बेचान पर रोक लगाई थी। लेकिन इसमें यह भी तय किया गया था कि सौ वर्ष से पहले बनी हो, उनका बेचान मूल स्वरूप नष्ट नहीं करने का शपथ पत्र देने पर किया जा सकता है। कई लोगों ने शपथ पत्र देकर बेचान अपने नाम करवा लिया, लेकिन इसके बाद किसी ने इसकी जांच नहीं की।
आवासीय स्वीकृति, व्यवसायिक निर्माण
विरासत पर हथौड़ा चलाने वाले गिरोह से जुड़े लोगों ने अब नया तरीका निकाल लिया है। रजिस्ट्री की बजाय आपसी समझौते की ‘लिखा-पढ़ीÓ पर सौदा किया जाता है। इसके लिए हवेली के मालिकों के परिवार से जुड़े कुछ सदस्यों को शामिल कर समझौता पत्र तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद मालिकाना हक रखने वाले व्यक्ति के नाम से निकाय से आवासीय निर्माण की स्वीकृति लेकर व्यवसायिक निर्माण किया जा रहा है। इसमें सैटबेक व दूसरे नियमों की भी पालना नहीं की जा रही है। लक्ष्मणगढ़ की एक हवेली के मामले में कस्बे के लोगों ने संभागीय आयुक्त तक शिकायत भेजी। संभागीय आयुक्त ने जांच के बाद कार्रवाई के आदेश दिए, लेकिन जिम्मेदारों ने कार्रवाई तो दूर मामला ही ठंडे बस्ते में डाल दिया।
कागजों में रेंग रहे आदेश और जांचसरकार ने भी शेखावाटी क्षेत्र की पुरा महत्व की इन हवेलियों के संरक्षण को लेकर समय-समय पर आदेश जारी किए, लेकिन ये आदेश और जांच कागजों में ही दफन होते रहे। तत्कालीन संभागीय आयुक्त हनुमान सिंह भाटी ने वर्ष 2015 में 30 अप्रेल को सीकर व झुंझुनूं के जिला कलक्टर को इन हवेलियों के विक्रय के संबंध में आदेश जारी किया था। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं संस्कृति ट्रस्ट की शिकायत पर संभागीय अयुक्त ने दोनों जिले के कलक्टर को आदेश जारी कर कहा था कि सीकर व झुंझुनूं जिले में एतिहासिक व पुरातन हवेलियों की अवैध खरीद-फरोख्त की जा रही है। इन हवेलियों में तोडफ़ोड़ कर इनके मूल स्वरूप को नष्ट किया जा रहा है। आदेश में यह भी बताया गया था कि शेखावाटी क्षेत्र के पर्यटन विकास को लेकर हुई बैठक में इन हवेलियों के संरक्षण का निर्णय किया गया था। इसके बाद भी यह सिलसिला रुक नहीं रहा है। ऐसे में इन हवेलियों के विक्रय एवं तोडफ़ोड़ पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में एतिहासिक एवं पुरातन हवेलियों का विक्रय नहीं हो। इन हवेलियों में किसी तरह की तोडफ़ोड़ पर भी रोक लगाई गई थी। लेकिन संभागीय आयुक्त का आदेश भी फाइलों में ही रहा। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि लक्ष्मणगढ़ की गोयनका परिवार की हवेली की तोडफ़ोड़ को रोकने के लिए कस्बे के धीरज राठौड़ व बाबूलाल सैनी ने स्थानीय उपखंड अधिकारी से लेकर जिला कलक्टर, संभागीय आयुक्त तक के साथ स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारियों को भी शिकायत दी। संभागीय आयुक्त दिनेश कुमार यादव ने 26 अप्रेल को जिला कलक्टर को इस पर कार्रवाई के आदेश दिए। इसके साथ ही दोषी व्यक्तियों, अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई के लिए कहा गया, लेकिन इन पर कार्रवाई होना तो दूर वहां पर अभी तक जिम्मेदारों ने निर्माण कार्य रुकवा कर जांच तक नहीं की है।
आंकड़ों से समझें आहत होती विरासत को
1500 से ज्यादा हवेलियां हैं सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिले में18वीं से 19वीं शताब्दी है इनका निर्माण काल
100 से अधिक हवेलियों को नेस्तनाबूद कर बना दी बहुमंजिला व्यवसायिक इमारतें पिछले पांच साल में

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