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HomeRajasthan NewsSikar news22 साल बाद सलाखों के पीछे पहुंचा हत्या का आरोपी

22 साल बाद सलाखों के पीछे पहुंचा हत्या का आरोपी

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सीकर. राजस्थान के सीकर जिले के गुंगारा में 22 साल से फरार हत्या के आरोपी को जेल भेज दिया गया है। दादिया पुलिस ने आरोपी श्रीराम को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेजने के आदेश सुनाए गए। दादिया थानाधिकारी ब्रिजेश सिंह ने तंवर ने बताया कि ताराचंद हत्या के आरोपी श्रीराम को जेल भेज दिया गया है। आरोपी श्रीराम अजमेर में श्रीराम से नाम बदलकर रामेश्वर रख कर पिछले 22 सालों से रह रहा था। अजमेर में वह एक विधवा महिला के साथ रहता था और अजमेर में प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने का काम करता था। शादी में शामिल होने के लिए कार से गंगापुर सिटी पहुंच गया था। वहां पर पुलिस ने उसे दबोच लिया। गुंगारा में 15 अगस्त 1998 को ताराचंद की घर जाते समय रास्ते में रोक कर मांगीलाल, हरलाल, श्रीराम, राजकुमार, इंद्राज व बजरंग ने लाठी व डंडों से मारपीट कर हत्या कर दी। दादिया पुलिस ने मांगीलाल, हरलाल, राजकुमार, इंद्राज व बजरंग को गिरफ्तार कर लिया। श्रीराम तब से ही फरार चल रहा था।
एक लाख का बीमा क्लेम देने के आदेश
सीकर. लोक अदालत ने बीमा क्लेम के एक लाख रुपए धारक को ब्याज सहित देने का अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मानसिक प्रताडऩा के 10 हजार व खर्च के भी 5 हजार रुपए देने के आदेश दिए। लोक अदालत सीकर अध्यक्ष अशोक कुमार व्यास ने फैसला सुनाया कि बीमा कंपनी 6 सप्ताह के अंदर मोहनी देवी को संपूर्ण बीमा राशि एक लाख रुपए व आवेदन प्रस्तुति 9 जुलाई 2018 से उक्त बीमा राशि पर 6 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देगी। बीमा कंपनी 10 हजार रुपए मानसिक रूप से परेशानी होने व 5 हजार रुपए व्यय के रूप में देगी। मोहनी देवी निवासी गांव भीमा दांतारामगढ़ ने लोक अदालत में 9 जुलाई 2018 को आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पति बोदूराम ने एक लाख रुपए की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। बीमा का प्रीमियम वह समय पर जमा करा रहे थे। 26 जून 2015 को नागौर के चितावा गांव में किशोर सिंह के कुएं में कार्य करते हुए फरमा टूट गया। तब वह कुएं की मिट्टी में धंसने के कारण दब गया। चितावा पुलिस व लोगों ने कुएं से उन्हें निकाला। उसकी हादसे में मौत हो गई। बोदूराम की मृत्यु पश्चात पत्नी मोहनी देवी ने बीमा पॉलिसी के क्लेम के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने उनका क्लेम आवेदन निरस्त कर दिया। बीमा कंपनी ने कहा कि बोदूराम ने बीमा कराते समय आयु के संबंध में सही जानकारी नहीं देने पर बीमा पॉलिसी को निरस्त कर दिया है। बोदूराम ने पहचान पत्र सहित अन्य दस्तावेज बीमा कराते समय एजेंट को जमा कराए थे। बीमा पॉलिसी निरस्त करने के बाद उन्होंने लोक अदालत में बीमा पोलिसी का क्लेम दिलाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। लोक अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों व दलीलों को सुनने के बाद बीमा पॉलिसी के क्लेम के रुपए देने का फैसला सुनाया।

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