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योगी आदित्यनाथ को एहसास है कि वह फिर मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे?

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) अपने खुद के नेतृत्व में अपनी सरकार की नाकामियों के पहाड़ पर खड़े होकर आने वाले 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जा रहे हैं. योगी आदित्यनाथ ने भड़काऊ बयान बाजी शुरू कर दी है.
योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) जब भी भड़काऊ बयानबाजी करते हैं उस वक्त यही लगता है कि, वह बीजेपी आईटी सेल की तरफ से व्हाट्सएप ग्रुप्स में जो फोटोशॉप और तथ्य हीन बातें फैलाई जाती हैं उससे बहुत अधिक प्रभावित हैं और अपना अधिक से अधिक समय काम पर देने की जगह व्हाट्सएप ग्रुप्स के मैसेजेस देखने में व्यतीत करते हैं.
कुशीनगर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने एक सभा को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में चारों तरफ विकास हो रहा है, हमने काम करने में कोई भी भेदभाव नहीं किया. क्या 2017 से पहले मुफ्त राशन मिलता था? इसके अलावा भी बहुत सारी बातें योगी आदित्यनाथ ने कही और कहा कि 2017 से पहले “अब्बा जान” कहने वाले राशन लूट लिया करते थे.
कोई पिताजी कहता है, कोई पापा कहता है, कोई अब्बा जान कहता है, कोई डैडी कहता है, कोई बाबूजी कहता है. आखिर “अब्बा जान” से योगी आदित्यनाथ को समस्या क्या है? इसके माध्यम से योगी आदित्यनाथ आखिर किस पर निशाना साध रहे हैं या फिर ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं? मुस्लिम अपने पिता को अधिकतर “अब्बा जान” कहकर संबोधित करते हैं. तो क्या है एक धर्म विशेष का मजाक उड़ाया योगी आदित्यनाथ ने?
बीजेपी के नेता और बीजेपी आईटी सेल द्वारा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को मुल्ला मुलायम कहकर उनके नाम पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश लंबे समय से की जाती रही है. व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में भी मुलायम सिंह यादव को मुसलमानों का समर्थक कहकर व्हाट्सएप मैसेज फॉरवर्ड किए जाते रहे हैं. तो क्या जिस तरीके से मुल्ला मुलायम कहकर ध्रुवीकरण की कोशिश की गई ठीक उसी तरह अखिलेश यादव को भी हिंदुओं का विरोधी और मुसलमानों का समर्थक बताने की कोशिश की जा रही है?
ध्रुवीकरण करने की कोशिश?
योगी आदित्यनाथ या तो एक धर्म विशेष के नाम पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे थे या फिर वह यह कहने की कोशिश कर रहे थे कि अखिलेश यादव मुलायम सिंह यादव को “अब्बा जान” कह कर बुलाते हैं. योगी आदित्यनाथ जो बात जनता से कहना चाह रहे थे वह अब्बा जान की जगह “पिताजी” भी बोल सकते थे. लेकिन इस शब्दों के हेरफेर के जरिए आखिर योगी आदित्यनाथ कौन सी नाकामी छुपाकर जनता को ही जनता के मुद्दों से दूर करके अपने ही प्रदेश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे?
एक संवैधानिक पद पर बैठकर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर फॉरवर्ड होने वाले उल जलूल मैसेज के अंदर जो बातें लिखी और कहीं जाती है उसका उपयोग करना क्या योगी आदित्यनाथ को शोभा देता है? योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि 2017 से पहले “अब्बा जान” कहने वाले लूट लेते थे और अब फ्री दिया जा रहा है. कई बीजेपी के नेता बयान दे चुके हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें इसलिए कम नहीं हो रही है कि उसी पैसे से वैक्सीन लगाई जा रही है, राशन बांटा जा रहा है.
फिर योगी आदित्यनाथ बताएं कि वैक्सीन और राशन फ्री कैसे हुआ? जनता को ही लूट कर उसी में से 2% हिस्सा जनता को दे देना और फिर एहसान जताना कहां तक सही है. पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं जिससे दूसरी वस्तुएं महंगी हो रही है, हर तरह से जनता की कमर टूट रही है. और उसके बाद जनता पर ही एहसान दिखाना आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को महंगा पड़ सकता है.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी गई नौकरियों के विज्ञापन की पोल पिछले दिनों खुल गई थी. दुर्गेश चौधरी से लेकर तमाम लोग झूठे निकले थे, जो दावे कर रहे थे कि योगी सरकार में उन्हें नौकरी मिली. उत्तर प्रदेश सरकार की हर मुद्दे पर किरकिरी हो रही है. कोलकाता के ब्रिज को अपना बताकर, अमेरिका की फैक्ट्री को अपना बताकर विज्ञापन के माध्यम से अपने ही प्रदेश की जनता को योगी सरकार मूर्ख बना रही है.
और गलती पकड़ी गई तो दोष न्यूज़ एजेंसी पर डालकर सवालों से बचने की कोशिश की गई और उसके बाद आने वाले चुनाव में संभावित हार की हताशा को देखते हुए ध्रुवीकरण करने की कोशिश आखिर कब तक? योगी आदित्यनाथ ने ट्विटर के माध्यम से लिखा कि कांग्रेस आतंकवाद की जननी है . आखिर नौकरी के मुद्दे पर, रोजगार के मुद्दे पर, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर, कानून व्यवस्था के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ने में डर क्यों लग रहा है?
जिस पार्टी ने अपने 2-2 प्रधानमंत्री देश के लिए शहीद कर दिए वह आतंकवाद की जननी? जिस पार्टी की सरकार में आतंकवादियों को फांसी दी गई, पाकिस्तान जैसे देश के दो टुकड़े कर दिए गए वह आतंकवाद की जननी है और जिस पार्टी की सरकार में आतंकवादियों को कंधार तक छोड़ कर आया गया वह देश भक्त पार्टी है? कांग्रेस का कोई भी प्रधानमंत्री आज तक पाकिस्तान नहीं गया और मोदी जी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देने पाकिस्तान पहुंच जाते हैं. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को जांच के लिए भारत बीजेपी की सरकार बुलाती है, फिर भी कांग्रेस आतंकवाद की जननी?
आखिर संवैधानिक पदों की गरिमा क्या होती है, यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कब समझेंगे? संवैधानिक पदों पर बैठा व्यक्ति अपनी पार्टी के आईटी सेल के कर्मचारियों की तरह बातें नहीं करता. व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में जो तथ्यहीन बातें फॉरवर्ड की जाती है, उस को आधार बनाकर बातें नहीं करता, यह बात योगी को आखिर कब समझ में आएगी? उत्तर प्रदेश की जनता इतनी भी मूर्ख नहीं है कि वह महंगाई, बेरोजगारी, अपराध, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को इस बार छोड़ देगी और ध्रुवीकरण की कोशिश करने वालों का साथ दे देगी.
The post योगी आदित्यनाथ को एहसास है कि वह फिर मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे? appeared first on THOUGHT OF NATION.

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