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दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारी क्यों घबरा रहा है भारत की एक समाचार पत्रिका से?

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दुनिया की सबसे बेशकीमती कम्पनी अमेज़ॉन (Amazon) और दुनिया के सबसे प्रभावशाली अख़बार वाशिंगटन पोस्ट के मालिक जेफ बेज़ोस आजकल भारत में अपने कारोबार को लेकर थोड़ा परेशान है. जब से आरएसएस का मुखपत्र कही जाने वाली पत्रिका पाञ्चजन्य ने जेफ़ बेज़ोस (Jeff bezos) पर ये आरोप लगाया है कि वे भारत में नई ईस्ट इंडिया कम्पनी (East India Company) का संचालन कर रहे है तभी से अमेज़न के अमेरिकी मुख्यालय में हलचल है.
टेस्ला कम्पनी के मालिक एलोन मस्क के बाद दुनिया के सबसे अमीर आदमी कहे जाने वाले जेफ़ बेजोस पर आरोप है कि वो ईस्ट इंडिया कम्पनी की तर्ज़ पर भारत के देसी व्यापार को चौपट कर रहे हैं. उनकी ऑनलाइन रिटेल कम्पनी अमेज़ॉन ने भारत में छोटे कारोबार और फुटकर व्यापारियों की कमर तोड़ दी है. यही नहीं पांचजन्य का ये भी आरोप है कि अमेज़ॉन की कम्पनी प्राइम वीडियो जिस तरह का कंटेंट देश में परोस रही है उससे हिन्दू संस्कृति पर प्रहार हो रहा है और ईसाई धर्म को बढ़ावा मिल रहा है.
प्राइम वीडियो भारत में काफी लोकप्रिय है और इस इंटरनेट प्लेटफार्म पर पश्चिमी संस्कृति की फिल्में प्रसारित करने के आरोप पाञ्चजन्य ने लगाए है. दरअसल अमेज़ॉन पर सबसे पहले हमला भारत के प्रमुख व्यापारी संगठन Confederation of All India Traders (CAIT) ने किया था. CAIT का कहना था कि रिश्वत से लेकर व्यापार के हर भ्रष्ट आचरण को अपना रहा है अमेज़ॉन. CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि अमेज़ॉन ने भारत में अपने वकीलों के ज़रिये कई लोगों को रिश्वत दी हैं. इस मामले की जाँच अब वे सीबीआई के ज़रिये कराना चाहते हैं.
ऐसा कहा गया है कि दो साल के भीतर अमेज़ॉन ने लगभग 1.2 बिलियन डॉलर की रकम भारत में फीस के तौर पर वकीलों को दी है. खंडेलवाल का कहना था कि इस फीस का बड़ा हिस्सा रिश्वत में इस्तेमाल हुआ है. इस रिश्वत के बल पर अमेज़ॉन ने भारत में नियमों, और अफसरों से समझौता करके तेज़ी से ई-कॉमर्स के कारोबार में पाँव जमाये हैं. व्यापारी संगठन के हमले के बाद आरएसएस के मुखपत्र पाञ्चजन्य को भी अमेज़ॉन को घेरने का मौका मिल गया.
दबी जुबान में भाजपा और आरएसएस के व्यापारिक प्रकोष्ठ के कई नेता पहले से ही विदेशी ऑनलाइन रिटेलर्स का विरोध कर रहे थे. इन आरोपों को लेकर ई-कॉमर्स दिग्गज ने अमेरिका में विभागीय जांच शुरू कर दी है. उधर रिश्वत के आरोपों की जांच U.S. Securities and Exchange Commission भी करने को मजबूर है क्यूंकि विदेश व्यापार के नियमों को कहीं न कहीं अमेज़ॉन ने अनदेखा किया है. सूत्रों के मुताबिक अमेज़ॉन पर लगे इन आरोपों के मद्देनजर पाञ्चजन्य के सम्पादिकी बोर्ड ने तय किया की जेफ़ बेज़ोस पर कवर स्टोरी करनी चाहिए.
ये कवर स्टोरी की खबर जब ट्विटर पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने साझा की तो भारत के अख़बारों और सोशल मीडिया पर इसकी जबरदस्त चर्चा हुई. जानकारों के मुताबिक जेफ़ बेजोस अपने व्यापार को बढ़ाने और मनमाफिक नीतियों के लिए सरकार से हमशा अच्छे रिश्ते रखते आये हैं. इसे उद्देश्य से उन्होंने अमिका के सबसे प्रभावी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट को ख़रीदा था.
लिहाजा आरएसएस के मुखपत्र में उनके खिलाफ छपी खबर वे परेशान हुए और अपने मातहतों को भारत में प्रकाशित कवर स्टोरी का स्पष्टीकरण जारी करने के आदेश दिए. पाञ्चजन्य की कवर स्टोरी पर प्रतिक्रिया देते हुए, अमेज़ॉन ने सफाई में एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया, महामारी के दौरान तीन लाख नए विक्रेता हमारे साथ जुड़े. जिनमें से 75,000 स्थानीय दुकानदार हैं जो 450+ शहरों में फर्नीचर, स्टेशनरी, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, सौंदर्य उत्पाद, मोबाइल फोन, वस्त्र, चिकित्सा उत्पादों का सामान बेचते हैं.
अमेज़ॉन ने सफाई में ये भी कहा की भारत के 70,000 दुकानदारों, व्यापारियों को 200 से ज्यादा देशों में निर्यात करने का भी मौका दिया गया है. जानकारों के मुताबिक चीन सरकार जिस तरह से जेफ़ बेज़ोस के कारोबार के पीछे पड़ी हुई है उससे सबक लेकर अमेज़ॉन भारत में कोई गलती नहीं करना चाहता है. अमेज़न के लिए अमेरिका के बाद भारत ही मुनाफे का सबसे बड़ा ठिकाना है.
लिहाजा जल्द ही अमेज़ॉन देश की मुख्यधारा मीडिया और सोशल डिजिटल प्लेटफार्म पर बड़ा जनसम्पर्क अभियान शुरू करने जा रहा है जिससे इस विदेशी कम्पनी की छवि लोगों की नज़र में सुधारी जा सके. ज़ाहिर है बेज़ोस अपने ऊपर लगे ईस्ट इंडिया कम्पनी के दाग को हर कीमत पर धोना चाहते हैं. वैसे भी कीमत इस खरबपति के लिए कोइ मायने नहीं रखती है.
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