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मेले में दो लाख ने किए श्याम दर्शन

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खाटूश्यामजी. बाबा श्याम के मासिक मेले में जलझूलनी एकादशी पर पूरी खाटू नगरी रंग रंगीले श्याम भक्तों से सरोबार हो रखी थी। मुख्य मेला मैदान और दरबार के बाहर बना जिगजैग श्याम भक्तों से अटा था। एकादशी पर तकरीबन दो लाख श्रद्धालुओं ने श्याम बाबा के दर्शन किए। रींगस से लेकर खाटूधाम तक का सडक़ मार्ग झांकियों से अटा था। श्याम मंदिर परिसर में स्थित गोपीनाथ मंदिर, रामजीद्वारा के सीताराम मंदिर, कबुतर चौक में सुखराम दास मंदिर, बाग वाले एवं बिहारीदास मंदिर के भगवानों की पालकी मुख्य बाजार से ग्राम के प्रमुख मार्गो से निकाली गई। वहीं रेवाड़ी वाली धर्मशाला में विशेष आरती की गई। पालकी में विराजमान भगवान के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किये। गोपीनाथ मंदिर के पुजारी राधेश्याम व्यास ने बताया कि यह सवारियां लगभग 400 वर्षो से लगातार निकाली जा रही है। इस अवसर पर हनुमानपुरा के राधारमण मंदिर, बाय में मुख्य बाजार में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर को फूल मालाओं से श्रंृगारित किया गया एवं लक्ष्मीनाथ धार्मिक उत्सव मण्डल के तत्वाधान में कृष्ण लीलाओं की विभिन्न झांकिया निकाली गई।नीमकाथाना/टोडा. शहर सहित उपखंड क्षेत्र में सोमवार को जलझूलनी एकादशी धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान मंदिरों से बाल-गोपाल नगर भ्रमण को निकले। लोगों सहित महिलाओं व बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लिया। महिलाओं ने एकादशी का उपवास रखकर परिवार के सुख -समृद्धि व शांति की कामना की। बाल गोपाल को नगर भ्रमण के लिए निकालकर जलाशय पर ले जाया गया। जहां पर उनको स्नान करवाया। इसके बाद ठाकुर जी की पूजा की। इसके बाद लोगों ने प्रसाद पाया। वहीं टोडा के बिहारी जी मंदिर, गोपाल जी मंदिर, सिरवाया मंदिर सहित अन्य मंदिरों से ठाकुर जी नगर भ्रमण को निकले। महिलाओं ने ठाकुर जी को भोग लगाया।गणेश्वर. गांव में स्थित गालव गंगा के कुण्ड में सोमवार को जलझूलनी एकादशी पर मंदिरों से ठाकुर जी को कुण्ड में जल विहार करवाया। जल विहार से पूर्व ठाकुर जी को पालकी में बैठाकर शोभायात्रा निकाली। वह नगर भ्रमण करवाया। गांव के ठाकुर जी सीताराम जी के मंदिर में विशेष आयोजन हुआ। विधि-विधान के साथ महाआरती की व प्रसाद वितरण किया।अजीतगढ़. अजीतगढ़ सहित क्षेत्र के गांवो में सोमवार को जलझूलनी एकादशी पर भगवान के डोले निकाले गये। भगवान के डोले मंदिरों से रवाना होकर कस्बे में घुमाए गये जो कस्बे के गोसाई बगीची तक ले जाकर पूजा-अर्चना कराई।

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