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PM मोदी की नजरों में आने के लिए कुछ उनके समर्थक देश के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वालों का अपमान कर रहे हैं

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मौजूदा दौर में देश दो पक्षों में पूरी तरीके से बट चुका है. एक पक्ष वह है जो अपने अपने क्षेत्र में रोजगार हीन हो चुका है. जो अपने-अपने क्षेत्र में पूरी तरीके से फ्लॉप हो चुका है. उसके पास अपने क्षेत्र की खुद की कोई उपलब्धि नहीं है, या यूं कह सकते हैं कि उसे उसके क्षेत्र में उसकी मंदबुद्धि के कारण या फिर कह सकते हैं क्षमता ना होने के कारण काम नहीं मिल रहा है.

इसलिए अब मौजूदा दौर में ऐसे लोग अपने आप को प्रधानमंत्री मोदी का और भाजपा का समर्थक साबित कर रहे हैं, या यू कह सकते है चाटुकार, ताकि यह लोग प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के नेताओं की नजर में आ जाए इनका समर्थन हासिल हो जाए ताकि आने वाले किसी चुनाव में इन्हें भाजपा अपनी पार्टी से टिकट देकर इन्हें चुनाव लड़ने का मौका दे दे.

इसमें कुछ रीढ़ विहीन पत्रकार भी शामिल है,जो दिन रात जनता के मुद्दों से दूर भाजपा का प्रचार करते रहते है.लेकिन आज पत्रकारों की बात नहीं होगी,आज बात होगी भाजपा के चिंटूओ की.

ऐसे लोगों की फेहरिस्त काफी लंबी है, लेकिन बातों का वजन इन लोगों का काफी छोटा है.

बात अगर दिल्ली विधानसभा के पूर्व विधायक कपिल मिश्रा की करें तो कपिल मिश्रा ने एक निहायत ही घटिया ट्वीट किया है पिछले दिनों, जिसमें उन्होंने धार्मिक टिप्पणी करते हुए एक धर्म विशेष को टारगेट करने की कोशिश की है. हालांकि इन पर उस ट्वीट के कारण पुलिस शिकायत भी हुई है.

आपको बताते चलें कि, यह कपिल मिश्रा जब आम आदमी पार्टी से विधायक थे उस समय इन्होंने दिल्ली विधानसभा के अंदर खड़े होकर मोबाइल फोन से एक वॉइस क्लिप सुनाई थी और इन्होंने देश के मौजूदा प्रधानमंत्री को यानि प्रधानमंत्री मोदी को रंगीला तक करार दिया था. उस समय यह मोदी विरोधी और भाजपा विरोधी हुआ करते थे. इन्होंने देश के मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी पर लड़कियों की जासूसी करवाने तक के आरोप लगाए थे.

आज कपिल मिश्रा आम आदमी पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं और अपने आप को प्रधानमंत्री मोदी की नजरों में चमकाने के लिए, भाजपा के नेताओं की नजरों में चमकाने के लिए लगातार धार्मिक टिप्पणियां कर रहे हैं और दूसरों को देश विरोधी, हिंदू विरोधी,पाकिस्तान समर्थक बता रहे हैं.

सवाल यहां पर यह उठता है कि, कपिल मिश्रा आज प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के समर्थक हैं तो कपिल मिश्रा से सवाल पूछा जाना चाहिए कि कपिल मिश्रा ने देश के प्रधानमंत्री के ऊपर जो आरोप लगाए थे क्या वह आरोप सही थे ? आज भी कपिल मिश्रा प्रधानमंत्री मोदी  पर लगाए गए उन आरोपों पर कायम है ? या फिर कपिल मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा के अंदर खड़े होकर सैकड़ों लोगों के सामने झूठ बोला था ? दोनों में से एक बात तो होगी. या तो आरोप सही हैं या फिर कपिल मिश्रा ने जनता के सामने झूठ बोला था.

बात यहां पर यह है कि अपने आप को हवा के रुख के साथ मोड़ने के चक्कर में विचारधारा से लगातार कुछ लोग समझौता कर रहे हैं.

आज ज्यादातर लोगों को पता है कि देश के अंदर धार्मिक टिप्पणी कर दो, दूसरों को पाकिस्तान परस्त बता दो, देश विरोधी बता दो तो अपने आप को भाजपा समर्थक साबित किया जा सकता है और भाजपा के नेताओं की नजरें इनके ऊपर पड़ सकती हैं. इसी चीज को देखते हुए लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में नाकाम हो चुके लोग भाजपा के नेताओं की नजरों में, प्रधानमंत्री मोदी की नजरों में आने के लिए लगातार टिप्पणियां कर रहे हैं दूसरों पर.

कपिल मिश्रा की तरह ही फ्लॉप डायरेक्टर अशोक पंडित का भी हाल है. अशोक पंडित लगातार दूसरी पार्टी के नेताओं पर अभद्र टिप्पणियां करते रहते हैं. जिस क्षेत्र का ज्ञान नहीं है अशोक पंडित के पास उसके बारे में भी तथ्यहीन बातें करते रहते हैं. जो भाजपा विरोधी है उसे पाकिस्तान परस्त बताते रहते हैं.

अशोक पंडित तो अपने आप को कश्मीरी पंडित बताते हैं. कश्मीर को लेकर लगातार बिन मांगी राय देते रहते हैं, लेकिन कभी अशोक पंडित ने बताया नहीं कि कश्मीरी पंडितों की मदद के लिए आज तक अशोक पंडित ने अपनी तरफ से क्या किया ?

कुछ ऐसा ही हाल फ्लॉप फिल्मों के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री का भी है. विवेक अग्निहोत्री लगातार कांग्रेस के नेताओं पर, गांधी परिवार पर, इस देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों पर अभद्र टिप्पणियां करते रहते हैं. जो भाजपा का समर्थक नहीं है, जो प्रधानमंत्री का समर्थक नहीं है, उसे पाकिस्तान परस्त और देश विरोधी, देशद्रोही बताते रहते हैं.

मौजूदा दौर में ऐसे तमाम लोग मिल जाएंगे जो अपने-अपने प्रोफेशन में फ्लॉप हो चुके हैं और आज खबरों में बने रहने के लिए विपक्षी पार्टी के नेताओं पर विपक्षी पार्टी के समर्थकों पर और जो पत्रकार भाजपा से, प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछते हैं उनको देश विरोधी, देशद्रोही करार देते रहते हैं.

अब सवाल यहां पर यह उठता है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा का समर्थक बनने के लिए सबसे पहली शर्त यही है कि विपक्षी पार्टी के नेताओं को, या फिर भाजपा के नेताओ से जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछनेवाले पत्रकारों को देश विरोधी, हिंदू विरोधी और पाकिस्तान परस्त बताना जरूरी है ? क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में अपने काम में फ्लॉप हो चुके लोग लगातार यही काम कर रहे हैं.

दूसरे क्षेत्रों से ज्यादा मौजूदा दौर में बॉलीवुड के तमाम फ्लॉप डायरेक्टर, एक्टर प्रोड्यूसर आज प्रधानमंत्री मोदी का समर्थक बनने की होड़ लगाए हुए हैं और इसी चक्कर में यह लोग देश के तमाम नामी-गिरामी पत्रकारों को पाकिस्तान परस्त, आतंकवादियों का समर्थक, देशद्रोही तक बताने से नहीं हिचक रहे हैं. अशोक पंडित ने तो द वायर की पत्रकार आरफा खान को यहां तक कह दिया कि बगदादी आरफा खान का आका है और बगदादी के मारे जाने पर आरफा खान को बहुत दुख हुआ होगा.

अशोक पंडित की द वायर की पत्रकार आरफा खान पर की गई टिप्पणी सिर्फ और सिर्फ देश के अंदर धार्मिक जहर फैलाने के लिए है. धर्म देखकर अशोक पंडित ने द वायर की पत्रकार आरफा खान का ताल्लुक बगदादी से जोड़ने की कोशिश की है.

ऐसे तमाम लोगों की शिनाख्त करके इन्हें लगातार बेनकाब करते रहने की जरूरत है. अगर इन लोगों के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई तो यह लोग एक कदम और आगे बढ़ेंगे. देश में नफरत को रोकना है, धार्मिक जहर को फैलने से बचाना है तो उसकी जड़ को खत्म करना होगा. उसकी जड़ को बेनकाब करना होगा और जड़ वही लोग हैं जो अपने आप को प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा का समर्थक बताने की होड़ लगाए हुए हैं.

यह भी पढ़े : क्या कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण कर रही है भाजपा?

Thought of Nation राष्ट्र के विचार
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