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अबकी बारी बिहारी नारी, पुरुषों पर और भी भारी

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बिहार अलग है और बिहार में होने जा रहे चुनाव एकदम अलग होंगे. बिहार चुनाव (Bihar Elections) की तारीखों का ऐलान हो गया है.
10 नवंबर को नतीजे आएंगे और उससे पहले तीन चरणों में मतदान होगा. पहले चरण की वोटिंग 28 अक्टूबर को होगी. बिहार में 243 सीटों के लिए मतदान होना है. कोरोना वायरस महामारी के बीच होने वाला ये पहले विधानसभा चुनाव हैं.
बिहार ऐसा राज्य है, जहां महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा वोट करती हैं. 2015 का विधानसभा चुनाव हो या 2019 का लोकसभा चुनाव, महिलाओं ने वोटर टर्नआउट में पुरुषों से 5 फीसदी ज्यादा वोट डाले थे. ये ट्रेंड 2005 में सबसे पहली बार राज्य में देखा गया था और उसके बाद से ये बढ़ता ही गया है. ऐसा कहा जा सकता है कि बिहार में सत्ता में कौन आएगा, ये तय करने में महिलाओं की भूमिका ज्यादा बड़ी है.
इसके लिए कई लोग सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को क्रेडिट देते हैं. उन्होंने पहले दौर में साइकिल की योजना रखी, उसके बाद स्कूली पोषाक और फ्री पढ़ाई पर जोर दिया. लेकिन इन सबसे बड़ी चीज जो नीतीश ने की थी, वो शराबबंदी का फैसला था. इससे मानो महिलाओं और पुरुषों के बीच पोलराइजेशन कर दिया था. इस फैसले के बाद नीतीश कुमार महिलाओं में काफी पॉपुलर हैं.
महिलाओं के बीच सिर्फ नीतीश ही नहीं, उनकी सहयोगी पार्टी बीजेपी भी अपना वोट बेस बढ़ाने पर जोर दे रही है. इसका उदाहरण तब देखने को मिला, जब पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘जय श्रीराम’ के नारे को ‘जय सियाराम’ कर दिया. इसको ऐसे देखा गया कि बीजेपी बिहार की बेटी सीता के नाम पर अपना वोट बेस महिलाओं के बीच मजबूत करने की कोशिश में है.
बिहार में महिला वोटर महत्वपूर्ण होने के पीछे जो एक और बड़ा कारण है, वो पंचायती राज में 50 फीसदी आरक्षण है. इसकी वजह से महिलाएं सिर्फ रबर स्टाम्प नहीं रहीं, बल्कि सार्वजानिक जिंदगी में उनकी हिस्सेदारी बढ़ी है. बिहार से बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाते हैं. बाकी चुनावों में ये लोग बिहार आकर वोट दें, इसकी संभावना बहुत कम होती है.
लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से प्रवासी कामगार बिहार वापस लौटें हैं और इनकी तादाद करीब 30-40 लाख बताई जा रही है. चुनाव तक कितने लोग बिहार में रहते हैं, ये तय नहीं है लेकिन फिर भी पुरुषों की चुनाव में भागीदारी महिलाओं से कम होने का एक कारण उनका बाहर काम करने जाना रहता है. तो इस बार महिलाओं के ट्रेंड पर इसका असर देखने को मिल सकता है.
पिछले चुनाव में 2015 में नीतीश कुमार की JDU, लालू यादव की RJD और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था. इस ‘महागठबंधन’ को 178 सीटें मिली थीं. हालांकि, बाद में नीतीश महागठबंधन से निकल गए थे और उन्होंने बीजेपी के साथ सरकार बना ली थी. बीजेपी के NDA गठबंधन को पिछले बार 58 सीटें ही नसीब हुई थीं.
आपको बता दे कि बिहार चुनाव से पहले जदयू को एक झटका लगा है. सीतामढ़ी जिले की जदयू की महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष रितु जायसवाल ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. रितु जायसवाल ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी को जिम्मेदार बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया है.
सीतामढ़ी जिले के जदयू अध्यक्ष राणा रणधीर सिंह को संबोधित पत्र में रितु जायसवाल ने लिखा, तकरीबन एक साल पूर्व जनता दल (यू) की सदस्य बनी. पार्टी की कर्मठ कार्यकर्ता होने के नाते नेतृत्व के द्वारा दी गई प्रत्येक छोटी बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन मैंने पूरी निष्ठा से किया. संगठन की मजबूती के लिए सबल पंचायत सक्रिय बूथ अभियान में भी मेरी भूमिका रही. नाराजगी जाहिर करते हुए रितु जायसवाल ने कहा, इस दौरान मैंने पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र का बहुत अभाव महसूस किया.
इसकी वजह से कार्यकर्ताओं में काफी रोष है और वो पार्टी नेतृत्व के फैसले से आहत नजर आ रहे हैं. लिहाजा जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मैं जदयू की महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रही हूं. सीतामढ़ी जिले में जदयू को यह झटका ऐसे समय लगा है जब बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है. बिहार में तीन चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं और 10 नवंबर को मतगणना होगी.
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