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सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर करोड़ों डकार गई सरकार

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सीकर. संविदा से स्थायी नौकरी के सपने दिखाकर सरकारों की ओर से बेरोजगारों को खूब ठगा गया है। करोड़ों रुपए आवेदन शुल्क लेने के बाद भी प्रदेश के दो लाख से अधिक बेरोजगारों का स्थायी नौकरी का सपना कागजों में उलझा हुआ है। मामला विद्यार्थी मित्र, पंचायतीराज विभाग के संविदाकर्मी एलडीसी और साक्षरता विभाग के प्ररेकों से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार के समय इनको नियमित करने के लिए बोनस अंकों के आधार पर भर्ती की राह खोली गई। लेकिन अभी तक यह भर्ती नियमों के पेंच में उलझी हुई है। सरकारी स्कूलों में काम कर चुके विद्यार्थी मित्रों के समायोजन के लिए किए गए हर सरकारी प्रयास अधूरे ही रहे है। इनके समायोजन के लिए राज्य सरकार ने शिक्षा सहायक, विद्यालय सहायक भर्ती शुरू की थी। लेकिन दोनों भर्तियां ही विवादों में उलझ कर रह गई और अभ्यर्थियों से फॉर्म भराने के बावजूद किसी को भी इन पदों पर नियुक्ति नही मिल पाई है। वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस ने चुनावी साल में शिक्षा सहायक के पदों के लिए भर्ती निकाली थी। वर्ष 2015 में विद्यालय सहायक भर्ती करने का प्रयास किया था, लेकिन इस भर्ती का हाल भी शिक्षा सहायक भर्ती की तरह ही हुआ। प्रदेश में किसी भी अभ्यर्थी को नियुक्ति नही मिल सकी। इन दोनों भर्तियो के विफल होने के बाद सरकार ने वर्ष 2017 में तीसरा प्रयास पंचायत सहायक भर्ती के रूप में किया। हालांकि इस भर्ती में भी जमकर विवाद हुए। बावजूद इसके सरकार सत्तर प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी मित्रों का इस भर्ती में समायोजन करने में सफल रही। लेकिन पंचायत सहायक के पद पर समायोजन हो जाने के बाद भी विद्यार्थी मित्रों को स्थायी सरकारी नौकरी मिलने का आज भी इंतजार है क्योंकि सरकार इन्हें स्थायी नौकरी देने की बजाय विद्यार्थी मित्र योजना की तरह ही पंचायत सहायक भर्ती नियत मानदेय पर अस्थायी तौर पर नौकरी दी है। जबकि करीब आठ वर्ष के लंबे समय तक अस्थायी तौर पर ये सभी विद्यार्थी मित्र के रूप में स्थायी नौकरी की आस में काम कर चुके है।
विद्यार्थी मित्र योजनायोजना शुरू करने का वर्ष 2006, सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का कार्य
कुल विद्यार्थी मित्रों की संख्या-करीब 25 हजारसरकार ने वर्ष 2014 में योजना का बंद कर दी
शिक्षा सहायक भर्ती: वर्ष 2013 में शुरू की गई
पदों की संख्या-33,500आवेदक-10.50 लाख, वर्ष 2015 में भर्ती को रद्द कर दिया गया
आवेदन शुल्क- 23 करोड़
विद्यालय सहायक भर्ती- वर्ष 2015 में भर्ती शुरू की गईपदों की संख्या-33, 500
लाखों अभ्यर्थियों को नियुक्ति, इसमें शिक्षा सहायक का आवेदन शुल्क समायोजित किया गयापंचायतीराज विभाग एलडीसी भर्ती-2013पद-19500
आवेदक- करीब 9.50 लाखफीस-18 करोड़
आधे पदों पर ही नियुक्ति मिल सकी
पंचायत सहायक भर्ती 2017इसमें अभी तक प्रदेश की करीब 2500 ग्राम पंचायतों में नियुक्ति नही हुई है
प्रत्येक अभ्यर्थी से 100 रुपए जमा किए थेशुल्क- डेढ करोड़
एक्सपर्ट व्यू
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संदीप कलवानिया का कहना है कि किसी को कई वर्षों तक अल्प मानदेय पर रखकर उसे सेवा मुक्त करना उचित नही है। सरकार को युवाओं को अस्थायी नौकरी देने की बजाय स्थायी नौकरी देने के प्रयास करने चाहिए। अस्थायी नौकरी एवं कम मानदेय के कारण युवाओं में निराशा बढ़ती है। सरकार भर्ती निकाल देती है, आवेदन जमा कर फीस के नाम पर करोड़ों रुपए जमा कर लेती है, जो पूर्णतया गलत है। सरकार को अटकी भर्तियो को पूरा करने के लिए ठोस नीति बनाने चाहिए।

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