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नामांकन के आधार रहेंगे शिक्षक, अधिशेष शिक्षकों की होगी रवानगी

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सीकर. मंत्रिमंडल में फेरबदल के साथ शिक्षा विभाग की टीम ने विभाग में भी बड़े उलटफेर की तैयारी कर ली है। विभाग की ओर से अगले महीने तक प्रारंभिक शिक्षा में दुबारा स्टाफिंग पैटर्न व समानीकरण की कवायद तेज हो गई है। इससे जिन स्कूलों में नामांकन कम है और वहां अतिरिक्त शिक्षक लगे हुए हैं तो उनको अब दूसरी स्कूलों में जाना होगा। इससे पहले वर्ष 2016 व 2019 में प्रारंभिक शिक्षा में समानीकरण हो चुका है। जबकि माध्यमिक शिक्षा में पिछले छह वर्ष से समानीकरण नहीं हुआ है। कोरोनाकाल में माध्यमिक शिक्षा में सबसे ज्यादा नामांकन बढ़ा है। ऐसे में शिक्षक संगठनों की ओर से माध्यमिक शिक्षा में भी स्टाफिंग पैटर्न करने की मांग उठाई जा रही है। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय ने स्टाफिंग पैटर्न और समानीकरण के लिए बुधवार से प्रक्रिया शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थी और कार्यरत शिक्षकों की संख्या को और अपडेट किया जा रहा है। आठ से ग्यारह दिसम्बर तक इन स्कूलों में अधिशेष रहने वाले शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा।
31 अक्टूबर तक के आधार पर होगी गणनाप्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में 31 अक्टूबर तक की छात्र संख्या के आधार पर समानीकरण किया जाएगा। इस दिन स्कूल में कितने विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका, विभाग की टीम शाला दर्पण पर इस आंकड़े को ऑनलाइन अपडेट करने में जुट गई है। इसमें बताया जाएगा कि कितने स्टूडेंट्स पर कितने टीचर्स स्कूल में रहेंगे। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एक दिसम्बर तक हर स्कूल का डाटा चैक कर इसे लॉक करेंगे।
6 दिसम्बर को जारी होगी सूची
विभाग की ओर से उन शिक्षकों की सूची जारी की जाएगी जो स्कूल में छात्र संख्या के मुकाबले अधिशेष है। इन शिक्षकों को सीधे इधर-उधर भेजने के बजाय काउंसलिंग के माध्यम से अन्य स्कूलों में भेजा जाएगा। ऑनलाइन काउंसलिंग होगी।
आठ सदस्यीय दल का गठनशिक्षा विभाग ने बीकानेर के संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है। जो प्रदेशभर में होने वाले समानीकरण पर नजर रखेगी। इस कमेटी में शाला दर्पण प्रकोष्ठ के उप निदेशक, बीकानेर के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, निदेशालय के प्रारम्भिक शिक्षा के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, शाला दर्पण के अनुभाग अधिकारी को शामिल किया गया है। इसके अलावा शैक्षिक अनुभाग, बजट और संस्थापन अनुभाग के अधिकारी को भी शामिल किया गया है।
शहरी स्कूलों में पद बढऩे की आस
विभाग को इस बार शहरी क्षेत्र के स्कूलों में कुछ पद बढ़ाने भी पड़ सकते हैं। दरअसल, कोरोना के कारण सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में नामांकन बढ़ा है। इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने से शहरी क्षेत्र में भी शिक्षकों की संख्या बढ़ेगी। खासकर महात्मा गांधी स्कूल्स में बच्चों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।दस लाख से ज्यादा नामांकन बढ़ा, फिर समानीकरण क्यों नहीं
माध्यमिक शिक्षा में दस लाख से अधिक का नामांकन बढ़ चुका है। लेकिन अभी तक समानीकरण की तैयारी नहीं की है। शिक्षा विभाग की ओर से छात्र अनुपात में शिक्षक नियुक्त करने चाहिए। ताकि विद्यार्थियों को बेहतर अध्यापन की सुविधा मिल सके।विपिन प्रकाश शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
हर दो साल में होनी चाहिए समीक्षा
2016 के स्टाफिंग पैटर्न में हर दो साल बाद नामांकन के आधार पर पदों की समीक्षा करनी थी। प्रारम्भिक शिक्षा में नामांकन कम हुआ है वहां दूसरी बार स्टाफिंग हो रहा है। लेकिन माध्यमिक शिक्षा में जहां नामांकन बढ़ा है वहां पदों में वृद्धि होगी इसलिए स्टाफिंग नहीं हो रहा है। विभाग माध्यमिक शिक्षा में बढ़े हुए नामांकन के आधार पर स्टाफिंग करें। इससे सैकंडरी में हजारों पद सृजित होंगे।उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत

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