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सुखजिंदर रंधावा ने ‘कैप्‍टन’ पर बोला हमला

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पंजाब के उप मुख्‍यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) ने राज्‍य के पूर्व मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह पर तीखा हमला बोला है. पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसके पहले अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने नई पार्टी बनाने की घोषणा करके हर किसी को चौंका दिया है.
रंधावा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में ‘कैप्‍टन’ को आड़े हाथ लिया, उन्‍होंने कहा कि यदि कांग्रेस ने 9 साल तक समर्थन नहीं किया होता तो वे (अमरिंदर) मुख्‍यमंत्री नहीं होते. रंधावा ने यहां तक कहा कि कैप्‍टन अमरिंदर सिंह अवसरवादी हैं और उन्‍होंने कांग्रेस की पीठ पर छुरा घोंपा है.
पंजाब के डिप्‍टी सीएम ने कहा, अमरिंदर आज, पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के बारे में बात कर रहे लेकिन पाकिस्‍तानी नागरिक अरूसा आलम उनके निवास पर रहती हैं. ईडी केस का सामना करने और पाकिस्‍तानी नागरिक को शरण देने के बाद से अमरिंदर सिंह ने बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया है.
गौरतलब है कि पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को ऐलान किया था कि वह नई पार्टी बनाएंगे. उन्‍होंने यह भी कहा था कि अगर किसान आंदोलन का समाधान उनके हित में हो जाता है तो पंजाब में भाजपा के साथ समझौते को लेकर भी वे विचार करेंगे. साथ ही अकाली समूहों से अलग हुए दलों सहित समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन करने का भी विचार करेंगे.
सुखजिंद सिंह से पहले, पंजाब सरकार के मंत्री परगट सिंह भी कैप्‍टन पर निशाना साध चुके हैं. परगट सिंह ने कहा था कि पिछले महीने बेवजह कांग्रेस से बाहर होने के बाद कैप्‍टन, भाजपा और उसकी जैसी अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ साझेदारी करने के लिए तैयार हैं. परगट सिंह ने कहा, मैंने हमेशा कहा था कि कैप्टन भाजपा और अकाली दल के साथ हैं. वह अपना एजेंडा भाजपा से लेते थे.
ख़त्म होगा किसान आंदोलन?
बीजेपी और मोदी सरकार भी चाहते हैं कि किसान आंदोलन का कोई हल जल्दी निकले. क्योंकि बीजेपी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के चुनाव में इसके असर को लेकर काफी चिंता है. इसके अलावा हरियाणा में यह आंदोलन गहरी जड़ें जमा चुका है और पंजाब में बीजेपी के ख़ुद को मज़बूत करने के सपने को भी किसान आंदोलन ने तहस-नहस कर दिया है. ऐसे में हो सकता है कि पांच राज्यों के चुनाव से पहले केंद्र सरकार और किसानों के बीच में किसी तरह का कोई समझौता हो जाए क्योंकि बीजेपी इतना बड़ा सियासी ख़तरा मोल नहीं लेना चाहेगी.
देखना होगा कि अमरिंदर सिंह कितनी मजबूती से विधानसभा का चुनाव लड़ पाते हैं और इसका कितना असर कांग्रेस पर पड़ेगा. क्योंकि कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में कुछ लोग अमरिंदर का हाथ पकड़ सकते हैं. लेकिन कांग्रेस के लिए अमरिंदर से ज़्यादा बड़ी मुसीबत नवजोत सिंह सिद्धू साबित हो सकते हैं.
सिद्धू बन रहे मुसीबत
अमरिंदर ने जब इस्तीफ़ा दिया था तो उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि उन्हें बिना बताए बार-बार विधायकों की बैठक बुलाई जा रही है. कांग्रेस नेतृत्व ने अमरिंदर की जगह पर दलित सिख समुदाय से आने वाले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया है. लेकिन उसकी परेशानी बड़बोले नेता नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर है. जब से चन्नी मुख्यमंत्री बने हैं, सिद्धू के तेवर सातवें आसमान पर हैं.
सिद्धू आए दिन कोई न कोई विवाद खड़ा कर ही देते हैं. निश्चित रूप से पंजाब के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को उनका यह रवैया काफी महंगा पड़ सकता है. अमरिंदर सिंह का कहना है कि वह बिखरे हुए अकाली समूहों जैसे ढींढसा और ब्रहमपुरा गुटों के साथ भी गठबंधन कर सकते हैं. उन्होंने अपने इरादे जाहिर करते हुए कहा कि वे तब तक आराम से नहीं बैठेंगे, जब तक वे अपने राज्य और इसके लोगों का भविष्य सुरक्षित नहीं कर लेते.
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