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सिक्का उछालकर पोस्टिंग, अमरिंदर के खिलाफ बगावती तेवर

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कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को पंजाब का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है. इसके साथ ही वहां पर दो डिप्टी सीएम भी बनाए जाएंगे. पहले सोमवार को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री शपथ लेंगे फिर कैबिनेट मंत्री तय होंगे.
इससे पहले पंजाब में अमरिंदर सिंह के कल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पंजाब में हालात को काबू में लाने के लिए कांग्रेस संघर्ष करती रही. कांग्रेस की ओर से अमरिंदर सिंह की जगह नए मुख्यमंत्री के अलावा दो डिप्टी सीएम भी बनाए जाने की संभावना पहले ही जताई जा रही थी. हालांकि सूत्रों ने कहा था कि डिप्टी के नाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि शीर्ष पद के लिए किसे मंजूरी मिलती है.
चरणजीत सिंह चन्नी को अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने का निर्णय कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया गया. बैठक को लेकर दोपहर बाद से हलचल तेज हो गई थी. जेडब्लू मेरियट में चरणजीत सिंह चन्नी और परगट सिंह समेत कांग्रेस के विधायक और नेता दोपहर पश्चात पहुंच गए थे. वहां हरीश रावत और अजय माकन पहले से मौजूद थे.
चन्नी के सहारे कांग्रेस ने पंजाब में 32% दलित वोट बैंक पर निशाना साधा है. अकाली दल के दलित डिप्टी सीएम बनाने के चुनावी वादे का भी तोड़ निकाल लिया. भाजपा ने भी दलित CM बनाने का वादा किया था. आम आदमी पार्टी दावा करती थी कि उन्होंने पंजाब विधानसभा में दलित नेता हरपाल चीमा को विपक्ष का नेता बनाया है. कांग्रेस ने इस दांव से सभी दलों को सियासी पटखनी दी है.
चरणजीत भी सुखजिंदर सिंह रंधावा की तरह कैप्टन के खिलाफ खुलकर बगावत करने वालों में शामिल थे, लेकिन रंधावा की जगह उन्हें तरजीह सिद्धू की वजह से ही मिली. सूत्रों का कहना है कि सिद्धू ऐसा CM चाहते हैं जो उनकी बात सुने. उधर, सुखजिंदर रंधावा का स्वभाव उस तरह का नहीं है कि वे किसी के कहे पर नाक की सीध में चलें.
25 घंटे के लम्बे इंतजार के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया गया. पंजाब में पहली बार किसी दलित को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनाया. पंजाब में सबसे ज्यादा 35% दलित वोट हैं. 34 विधानसभा सीटों पर दलित तय करता है कि कौन विधायक बनेगा. सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम पर लगभग सहमती बन गयी थी.
चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का फैसला होने के बाद, इस पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि वे पार्टी हाईकमान के फैसले को लेकर खुश हैं. उन्होंने कहा कि मैं सभी विधायकों का आभारी हूं, जिन्होंने मेरा समर्थन किया. चन्नी मेरे भाई हैं.
शुरुआत हुई थी कि हिन्दू चेहरे और पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. जिस पर राहुल गांधी से लेकर नवजोत सिंह सिद्धू तक, सब सहमत थे लेकिन पंजाब के माझा इलाके के आने वाले सिख नेताओं ने दिल्ली में प्रियंका गांधी से बात की और कहा कि पंजाब में जट सिख को अगर मुख्यमंत्री नहीं बनाया तो कांग्रेस 2022 का चुनाव हार जाएंगे. अंबिका सोनी, के सी वेणुगोपाल ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और आखिर में ना ही जट सिख को मुख्यमंत्री बनाया और ना ही किसी हिन्दू को.
राहुल गांधी ने आखिर में दलित को मुख्यमंत्री बनाकर राजनीतिक चाल चली. इससे पहले कांग्रेस ने पार्टी के महासचिव अजय माकन और हरीश चौधरी को पर्यवेक्षक बनाकर चंडीगढ़ भेजा था. कांग्रेस आलाकमान को डर था कि कहीं कैप्टन अमरिन्द्र सिंह बगावत ना कर दें. कैप्टन को हटाने से तीन दिन पहले ही दिल्ली आलाकमान ने विधायकों से बात करनी शुरू कर दी थी. शाम को पांच बजे विधायक दल की बैठक होनी थी और दिल्ली आलाकमान की रणनीति के मुताबिक कम से कम 45 विधायकों को कहा गया कि आप लोग प्रस्ताव पारित कर दीजिए कि हम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर फैसला छोड़ते है. जिसे भी मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, हमें मंजूर होगा.
कांग्रेस आलाकमान की रणनीति सटीक चल रही थी. पंजाब को दलित मुख्यमंत्री देकर कांग्रेस ने अपने लिए मास्टर स्ट्रोक चला ही साथ ही आम आदमी पार्टी को भी विधानसभा चुनाव से पहले झटका दे दिया. पंजाब के मालवा इलाके में आप पार्टी को बहुत फ़ायदा हुआ था और एक बड़ा दलित वोट जो आम आदमी पार्टी के साथ है उसे तोड़ने का प्रयास भी राहुल गांधी ने इस फैसले के जरिए किया गया है.
इससे पहले विधायक, सांसद और कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के विरोध के बावजूद कांग्रेस आलाकमान ने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया और अब कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर और एक दलित को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश दिया है कि कांग्रेस आलाकमान कमजोर नहीं है.
नवजोत सिंह सिद्धू और पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के जरिए गांधी परिवार पार्टी के बाकि नेताओं यह संदेश देना चाहता है कि सबको कांग्रेस आलाकमान और पार्टी के हिसाब से ही काम करना होगा. इन फैसलों से एक संदेश सीधे जयपुर भी गया है जहां, कैबिनेट विस्तार काफी लम्बे समय से अटका हुआ है.
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