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उप चुनाव से पहले शेखावाटी में गर्माया सियासी पारा

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फतेहपुर.प्रदेश में होने वाले विधान सभा उप चुनाव से पहले शेखावाटी में सियासी पारा गर्माया हुआ है। भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूजे पर जमकर सियासी हमले बोल रहे हैं। भाजपा में नेतृत्व को लेकर भले ही घमासान चल रहा हो, इसके लिए दिल्ली में बैठक भी होनी है। इससे पहले पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वंसुधरा राजे सर्वमान्य नेता है। वो ही अगली मुख्यमंत्री होगी। कालीचरण सराफ बुधवार को कुलदेवी मंदिर में धोक लगाने के लिए फतेहपुर आए थे। मीडिया से बातचीत करते हुए सराफ ने कहा कि हमारे यहां नेतृत्व को लेकर कोई झगड़ा नही होता है। हमारे यहां सभी एक मुखी होकर चलते है। सराफ ने कहा वसुन्धरा हमारे सर्वमान्य नेता थी सर्वमान्य नेता है व सर्वमान्य नेता रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्थान में चुनाव उन्हीं के नेत्तृव में चुनाव लड़ा जाएगा भावी मुख्यमंत्री राजे ही बनेगी। गौरतलब है कि वसुंधरा राजे को सीएम का चेहरा घोषित किए जाने को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच 21 फरवरी को वसुंधरा राजे और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां का आमना-सामना होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में 21 को दिल्ली में पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई गई है। इसमेें राजे बतौर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूनियां प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर शामिल होंगे। इसके अलावा पेट्रोल व डीजल की बढ़ती कीमतो तो लेकर काली चरण सराफ ने कहा कि कोरोना महमारी के कारण सरकार का कोई नियत्रंण नहीं है। हमारा दुर्भाग्य है कि राजस्थान में पूरे देश में सबसे ज्यादा वैट है। राज्य सरकार को वैट कम करना चाहिए। किसान आंदोलन को लेकर सराफ ने कहा कि किसानों को आन्दोलन खत्म करना चाहिए। काग्रेस गुमराह करने का काम कर रही है। किसानों से अपील की आन्दोलन समाप्त करे। इस दौरान रमेश भोजक ने बिदंल कुलदेवी मंदिर में नगर अराध्य देव लक्ष्मीनाथ भगवान के मंदिर में सराफ को पूजा अर्चना करवाई।
प्रवक्ता अर्चना शर्मा बोलीं, थोड़ी भी गंभीरता हो तो उन्हें अपनी सरकार को कृषि कानून वापस लेने के लिए समझाना चाहिएसीकर. केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनकारी किसान व सरकार की वार्ता की तुलना पति-पत्नी के झगड़े से करने वाले सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती के बयान पर कांग्रेस की पूर्व उपाध्यक्ष व प्रवक्ता डा. अर्चना शर्मा ने पलटवार किया है। डा. शर्मा ने सांसद के बयान को खोखली मानसिकता का परिचायक बताया है। उन्होंने कहा कि किसान देश का सबसे बड़ा वर्ग है, जो अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ा संबल देता है। उसकी बदहाली करने के बाद उसकी मांग को पत्नी-पति का झगड़ा बताना खोखली सोच है। शर्मा ने कहा कि यदि सांसद में थोड़ी भी गंभीरता हो तो अपनी सरकार को झकझोरते हुए कृषि कानून वापस लेने के लिए समझाना चाहिए। उन्होंने सीकर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह बात कही। गौरतलब है कि सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने दो दिन पहले किसान आंदोलन को कांग्रेस व कम्यूनिस्टों का आंदोलन करार दिया था। किसान व सरकार की वार्ता की तुलना पति-पत्नी के झगड़े से करते हुए उन्होंने कहा था कि किसानों की कानून वापसी की मांग वैसी है जैसे पति से झगड़े के बाद घर लौटी पत्नी के परिजन संबंध खत्म कर समझौता वार्ता करने की बात करें। इस दौरान कांग्रेस आईटी सेल के प्रभारी गोविन्द पटेल, पार्षद सुशील माटोलिया, शहर कांग्रेस सेवादलल अध्यक्ष रविकांत तिवाड़ी, मुकन्द तिवाड़ी, अंकुर बहड़, कुलदीप आजाद, मुकूल शर्मा, अभिषेक शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
सड़क से संसद तक कांग्रेस साथकांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता ने कृषि कानूनों के साथ महंगाई को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। कहा कि कोरोना लॉकडाउन की वजह से जब देश में अर्थव्यवस्था गिर रही थी, उस समय सरकार ने किसानों के खिलाफ कृषि कानून पास किए। जो कानून किसानों ने मांगा ही नहीं उसे बिना विमर्श के लागू करने के बाद सरकार अब किसानों की सुन भी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक में किसानों के साथ है। सरकार को चाहिए कि वह तीनों अवांछित कानून वापस ले। महंगाई पर कहा कि भाजपा इसी मुद्दे को लेकर सत्तारूढ हुई थी। लेकिन, अब दो महीने में ही पेट्रोल के दाम 100 रुपए पार व रसाई गैस के दाम में 200 रुपए की बढ़ोत्तरी कर सरकार कोरोना काल की आर्थिक मार के बीच जनता की जेब पर डाका डाल रही है।

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