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ऑक्सीजन प्लांट सीकर की जनता का: कलक्टर

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सीकर. सीकर के लिए सोमवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। सीकर में लगने वाले ऑक्सीजन प्लांट को लेकर आमजन के मन में कई तरह के सवाल है। इसको लेकर राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने जिला कलक्टर अविचल चतुर्वेदी से खास बातचीत की। कलक्टर ने कहा कि सीकर की जनता के उत्साह को मैं कभी नहीं भुला सकूंगा। उन्होंने कहा कि हमारे लिए कोई भी भामाशाह छोटा या बड़ा नहीं है। मैं खुद को भी भाग्यशाली समझता हूं कि जनता ने हम पर पूरा विश्वास किया। ऑक्सीजन प्लांट पर पूरे सीकर की जनता का हक है। जिला कलक्टर से बातचीत के प्रमुख अंश।————————सवाल: ऑक्सीजन प्लांट की साइट अचानक क्यों बदली गई।जवाब: पहले हमारा मानस सांवली मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की क्षमता के हिसाब से छोटा ऑक्सीजन प्लांट बनाने का था। लेकिन सीकर की जनता ने जो उत्साह दिखाया उससे जिला प्रशासन को और ताकत मिली। प्रशासन ने स्वदेशी कंपनी से रेट मंगवाई और हमारा प्रतिनिधि वहां जाकर भी आया। इस दौरान एक्सपर्ट ने भी कहा कि इतना बड़ा प्लांट अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में लगाएंगे तो वहां मरीज काफी डिस्टर्ब होंगे। इसलिए इस प्लांट को दूसरे स्थान पर लगाना चाहिए। इसके अलावा भूमि रूपान्तरण सहित अन्य भी कई कारण रहे।————————सवाल: पलसाना रीको का ही चयन क्यों किया गया।जवाब: पलसाना रीको सीकर जिला मुख्यालय के अलावा खंडेला, दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर, अजीतगढ़, नीमकाथाना से सीधे जुड़ा हुआ है। इसके अलावा सीकर, लक्ष्मणगढ़ व फतेहपुर से पलसाना की दूरी ज्यादा नहीं है। यहां हाइवे पर सरकार से निशुल्क जमीन भी मिल गई। औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से बिजली व पानी के कनेक्शन के लिए महंगा डिमांड ड्राफ्ट भी कनेक्शन के लिए नहीं चुकाना पड़ेगा।—————-सवाल: पहले प्रोजेक्ट मई महीने तक पूरा होना था, अब तो काम शुरू हुआ है।जवाब: काम में देरी के पीछे कई वजह रही है। पहले हम चीन से प्लांट मंगा रहे थे वह कंपनी पूरा पैसा एकमुश्त मांग रही थी। इसके अलावा भविष्य में प्लांट में तकनीकी खराबी आने पर परेशानी बढ़ सकती थी। वहीं इससे कम रेट में हमको भारत की कंपनी ने प्लांट उलब्ध कराने का तर्क दिया। दोनों कंपनियों के अनुभव को देखते हुए स्वदेशी कंपनी को चुना गया। इस वजह से थोड़ी देरी हुई है लेकिन अब 20 से 25 दिनों में प्लांट का काम पूरा होगा।—————–सवाल: कई संगठनों का आरोप है कि कार्यक्रम का कांग्रेसी करण किया गया।जवाब: ऐसा नहीं है। लॉकडाउन की वजह से महज औपचारिक कार्यक्रम किया गया। इसका क्रेडिट किसी एक को नहीं है। यह प्लांट सीकर की जनता का है।——————-सवाल: कुछ लोगों का आरोप है कि भामाशाहों को नहीं बुलाया गया।जवाब: ऑक्सीजन प्लांट सीकर की जनता का है। आज इतने भामाशाहों को बुलाया जाना संभव नहीं था। उद्घाटन तक यदि स्थिति बदली तो सभी भामाशाहों को बुलाया जाएगा। प्रशासन की ओर से भामाशाहों को आभार पत्र भी भिजवाए जा रहे हैं।———————-सवाल: स्थान परिवर्तन को लेकर भामाशाहों को सूचना दी गई क्या।जवाब: जो भामाशाह लगातार हमारे सम्पर्क में है उनको लगातार स्थान परिवर्तन के बारे में भी बताया गया और सुझाव भी मांगे गए। सीकर की भामाशाह आज बेहद खुश है कि उनके दिए हुए पैसे से मरीजों को प्राण वायु मिल सकेगी।——————–सवाल: कोविड से जंग जीतने के बाद इस प्लांट का क्या उपयोग हो सकेगा।
जवाब: स्थान चयन में भी इस मुद्दे का पूरा ध्यान रखा गया है। पलसाना में लगने से इसका बेहतर उपयोग भी हो सकेगा।

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