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जिले के सबसे बडे कल्याण अस्पताल के ट्रोमा में ट्रॉलीमेन नहीं

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सीकर. भले ही आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज के लिए हर सुविधा उपलब्ध करवाने का दावा किया जाता हो लेकिन हकीकत यह है कि मेडिकल कॉलेज के अधीन शेखावाटी के सबसे बडे कल्याण अस्पताल की आपातकालीन इकाई में सुबह के समय केवल ट्रॉलीमेन है जबकि सबसे Óयादा मरीज सुबह की पारी में पहुंचते हैं। इस कारण गंभीर मरीज को वार्ड या जांच के लिए लेकर जाने में परेशानी होती है। सबसे Óयादा परेशानी ट्रोमा में आने अज्ञात मरीज के मामले में होती है। ऐसे में स्टॉफ को ऐसे मरीज की जांच से लेकर वार्ड तक लेकर जाना पड़ रहा है। जबकि ट्रोमा यूनिट में पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर ट्रॉली व व्हील चेयर उपलब्ध है। इसके बावजूद पिछले एक माह से ट्रोमा ट्रॉलीमेन नहीं है। गौरतलब है कि ट्रॉलीमेन की कमी को लेकर ट्रोमा स्टॉफ ने लिखित में नर्सिंग अधीक्षक को अवगत करा दिया है।
यह है कारणकल्याण अस्पताल में पिछले दिनो संविदा कार्मिकों ने ट्रॉली खींचने से इंकार कर दिया इसके बाद संविदा पर लगे 19 कार्मिकों को हटाया गया था। इसके बाद आरएमआरएस की मीटिंग में 19 नए ट्रॉलीमेन लगाने का निर्णय किया गया। इसके अलावा हटाए गए कार्मिक ने खुद का सुरक्षाकर्मी बताते हुए न्यायालय की शरण ले ली और न्यायालय ने इन लोगों को वापस लगाने के निर्देश दिए इसके बाद से ट्रॉलीमेन का काम करने से मना कर दिया।
इनका कहना है।ट्रोमा मे पिछले तीन माह से केवल पांच ट्रॉलीमेन ही है। इनमें से एक सुबह, दो इवनिंग और दो नाइट में ड्यूटी देता है। कई बार किसी के बीमार या ऑफ लेने पर परेशानी होती है। सुबह के समय मरीज Óयादा होते हैं उस दौरान एक कर्मचारी के होने से परेशानी होती है। जबकि पूर्व में आठ ट्रॉलीमेन काम करते थे। कई बार अवगत करा दिया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।- फूलचंद सैनी, ट्रोमा प्रभारी कल्याण अस्पताल

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