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NEET 2019: 12 जून से होगी काउंसलिंग शुरू, इन बातों का रखें ध्यान

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Aajkal Rajasthan

नीट 2019 का रिजल्ट आ चुका है। इस वर्ष का रिजल्ट 56.50 प्रतिशत रहा है। रिजल्ट आने के साथ ही मेडिकल तथा डेंटल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी। नीट की काउंसलिंग दो स्तर (1) ऑल इंडिया तथा (2) स्टेट लेवल पर होगी।

नीट काउंसलिंग के बारे में जानिए –
तीन चरणों में होगी काउंसलिंग

ऑल इंडिया लेवल की काउंसलिंग 12 जून 2019 से आरंभ होगी तथा स्टेट लेवल की 25 जून से आरंभ होगी। काउंसलिंग की अंतिम तिथि 18 अगस्त है। इसके बाद एडमिशन नहीं होगा। काउंसलिंग में तीन राउण्ड, फर्स्ट काउंसलिंग, सेकंड काउंसलिंग तथा मोपअप राउंड होंगे। इन्हीं के जरिए नीट परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों को उनकी मेरिट तथा च्वॉइस के आधार पर मेडिकल कॉलेज अलॉट किए जाएंगे।
इस परीक्षा के जरिए जिन सीटों पर एडमिशन होना है, उनमें 85 प्रतिशत सीटों पर काउंसलिंग स्टेट सरकार तथा शेष 15 प्रतिशत सीटों पर काउंसलिंग सेंट्रल गवर्नमेंट के कोटे में मानी जाती है। पहले ऑल इंडिया लेवल पर काउंसलिंग होती हैं। यदि काउंसलिंग के बाद भी नेशनल लेवल की सीटें रिक्त रह जाती है तो वो स्टेट गवर्नमेंट को दे दी जाती है जिस पर एडमिशन के लिए स्टेट ऑथोरिटी काउंसलिंग करवाती है।
कॉलेजों में एडमिशन के लिए नीट उत्तीर्ण होने के बाद छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज चिन्हित करते हुए रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। रजिस्ट्रेशन के बिना छात्र किसी भी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाएगा। रजिस्ट्रेशन पहले राउंड की काउंसलिंग के पहले अथवा दूसरे राउंड की काउंसलिंग के पहले करवाया जा सकता है। जो इन दोनों के लिए ही रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सके वो मोपअप राउंड के लिए भी रजिस्ट्रेशन करवा कर एडमिशन ले सकते हैं।
एडमिशन छोड़ने पर देने होंगे 5 लाख रुपए

यदि छात्र का काउंसलिंग के जरिए मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हो जाता है और वह उस कॉलेज को ज्वॉइन न कर किसी अन्य कॉलेज में एडमिशन लेना चाहता है तो उसे एडमिशन छोड़ने के बदले 5 लाख रुपए देने होते है, अन्यथा छात्र के ऑरिजनल डॉक्यूमेंट वापिस नहीं लौटाए जाते। छात्र एक ही कॉलेज में एडमिशन ले सकता है, किसी अन्य में नहीं।
प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन के लिए सरकार की अनुमति जरूरी है। यदि छात्र का किसी सरकारी अथवा मनचाहे कॉलेज में एडमिशन नहीं हुआ है तो वह प्राइवेट कॉलेज में भी अप्लाई कर सकता है। परन्तु इसके लिए उसका रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है। किसी भी प्राइवेट कॉलेज में सीट खाली रहने पर उसकी जानकारी राज्य सरकार को भेजी जाती है, जिसके बाद रिक्त सीटों का दस गुणा आवेदकों की सूची सरकार उस कॉलेज को भेजती है, प्राइवेट कॉलेज इसी लिस्ट में से चुने गए छात्रों को एडमिशन दे सकते हैं, अन्य को नहीं।
नीट के जरिए भारत के बाहर भी एडमिशन लिया जा सकता है।छात्र नीट परीक्षा पास करने के बाद न केवल भारतीय मेडिकल कॉलेज वरन भारत से बाहर विदेशों में स्थित मेडिकल कॉलेजों में भी एडमिशन ले सकते हैं परन्तु इसके लिए उन्हें वहां आयोजित होने वाली परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना होगा। कुछ देश जैसे रुस, चीन तथा श्रीलंका में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए एंट्रेंस एग्जाम नहीं होते, जबकि यूरोप व अमरीका के अधिकतर कॉलेजों में TOEFL सहित अन्य एंट्रेंस एग्जाम भी पास करने होते हैं। भारत से बाहर नीट की वेलिडिटी तीन वर्ष के लिए होती है जबकि भारत में केवल एक वर्ष के लिए मान्य है, यह अवश्य ध्यान में रखें।

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