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इमरान और नरेंद्र मोदी की जुगलबंदी लगातार देखने को मिल रही है

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2019 लोकसभा चुनाव से पहले से ही पाकिस्तान के साथ तनाव अपने चरम पर था, मीडिया डिबेट देखकर और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चुनावी रैलियों से या फिर किसी भी मंच से भाषणों के द्वारा जो बम फेंके जा रहे थे, उससे ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तान के साथ युद्ध कभी भी हो सकता है. मीडिया चैनलों में भी इसी तरीके का माहौल तैयार किया जा रहा था, जैसे जनता यह मान ले कि एक-दो दिन में पाकिस्तान से युद्ध छिड़ने वाला है.

हमारे सैनिकों पर आतंकवादी हमला हुआ. पुलवामा में 40 से ऊपर जवान शहीद हो गए, उसके बाद लगातार इस तरीके का माहौल बनाया गया, जैसे पाकिस्तान के तीन चार टुकड़े हिंदुस्तान की सरकार कर देगी. 2019 का चुनाव पुलवामा हमले पर भाजपा ने लड़ा और जीत लिया.

फिर से देश के अंदर कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, फिर से पाकिस्तान को मुद्दा बनाकर भाजपा आने वाले विधानसभा के चुनाव लड़ने की तैयारी में है. साथ में कश्मीर का मुद्दा चल ही रहा है. 370 के सहारे और इमरान खान और पाकिस्तान के सहारे भाजपा आने वाले विधानसभा चुनाव को जीतने की तैयारी कर रही है.

प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के दौरे पर थे , वहां से लगातार प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान को टारगेट कर रहे थे. कभी नाम लेकर कभी बिना नाम लिएअमेरिका में जिस भी मंच से प्रधानमंत्री मोदी भाषण दे रहे थे, पाकिस्तान को टारगेट कर रहे थे. उसी बात को हिंदुस्तान की मीडिया लगातार कवरेज देकर जनता के जरूरी मुद्दों से जनता का ही ध्यान हटाकर पाकिस्तान के नाम पर देश में जहर फैला रही है.

एक ही मंच पर प्रधानमंत्री मोदी और इमरान खान ने कल यानी शुक्रवार को भाषण दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने उस मंच से पाकिस्तान पर कुछ भी नहीं बोला. इस बार मौका था इमरान खान का, इमरान खान ने लगातार कश्मीर के मुद्दे को उठाया. इमरान खान द्वारा कहा गया कि जम्मू कश्मीर में कर्फ्यू लगाया गया है, लोगों पर अत्याचार किया जा रहा है, जम्मू कश्मीर के लोगों को मारा जा रहा है. जम्मू कश्मीर से जिस दिन कर्फ्यू हटेगा, उस दिन खून खराबा होगा. जम्मू कश्मीर की जनता हथियार उठा लेगी, जम्मू कश्मीर के मुसलमान हथियार उठा लेंगे, फिर से पुलवामा जैसा हमला होगा और भारत उसका इल्जाम पाकिस्तान पर लगाएगा.

लगातार इमरान खान भारत को टारगेट करने की कोशिश कर रहे थे, इमरान खान ने आगे यह भी कहा कि जिस तरीके का माहौल तैयार किया जा रहा है, भारत द्वारा, उस पर दुनिया के देश प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं, पाकिस्तान का साथ नहीं दे रहे हैं, भारत के साथ खड़े हैं. अगर दुनिया के देशों का रवैया यही रहा तो फिर स्थिति और खराब होगी. दो देश जंग की तरफ जाएंगे और जब जंग होगी तो यह आसानी से रुकेगी नहीं यह परमाणु युद्ध की तरफ भी बढ़ सकती है, जिसका असर दुनिया पर होगा.

प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों के माध्यम से पाकिस्तान पर बमबारी कर रहे हैं और इमरान खान अपने भाषणों के माध्यम से भारत पर बमबारी कर रहे हैं और दोनों ही देशों की मीडिया अपने अपने देश की जनता को राष्ट्रीय मुद्दों को आधार बनाकर पड़ोसी देशों को टारगेट करके गुमराह करने की कोशिश कर रही है. प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दोनों अपने-अपने देश की जनता को भाषण के माध्यम से अपने पक्ष में बनाए रखना चाह रहे हैं और इसमें यह दोनों नेता कामयाब भी हो चुके हैं.

भाजपा एक बार फिर से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के भाषणों के माध्यम से मीडिया द्वारा प्रचार करवा कर देश की जनता की नसों में छद्म राष्ट्रवाद का जहरीला नशा डालकर जनता को जनता के ही जरूरी मुद्दों को भूलने पर मजबूर करेगी. भाजपा एक बार फिर से पाकिस्तान के नाम पर, आतंकवाद के नाम पर, कश्मीर के नाम पर जनता को वोट देने के लिए आने वाले विधानसभा चुनाव में मजबूर करेगी और जनता भाजपा को वोट करेगी भी. भाजपा इन्हीं मुद्दों के सहारे आने वाले विधानसभा चुनाव जीतने जा रही है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार अपने भाषणों में भाजपा की तुलना हिटलर की पार्टी से कर रहे हैं. आरएसएस की तुलना हिटलर की पार्टी से कर रहे हैं और पाकिस्तान की जनता को यह कह रहे हैं कि हमारी लड़ाई एक कट्टर विचारधारा से है. भारत में इस समय हिटलर के नक्शे कदम पर चलने वाली पार्टी की सरकार है, जो किसी की नहीं सुनते. कश्मीर को ताले में बंद कर दिया है. कश्मीर की जनता पर पाबंदी लगा दी है. हमें उनसे लड़ना है. यह सब बातें करके इमरान खान पाकिस्तान के अंदर खुद को फेमस बनाए रखना चाहते हैं.

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यही इमरान खान 2019 लोकसभा चुनाव से पहले यह बयान देते हुए पाए गए थे कि, मैं चाहता हूं कि 2019 लोकसभा चुनाव भाजपा जीते और नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बने. अगर नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनते हैं तो कश्मीर का मुद्दा सुलझाया जा सकता है और मुझे पूरा भरोसा है कि अगर प्रधानमंत्री मोदी दोबारा चुनाव जीतते हैं तो पाकिस्तान के लिए यह अच्छी खबर होगी.

कुल मिलाकर देखा जाए तो दोनों देश की सत्ताधारी पार्टी और दोनों देश के प्रधानमंत्री अपने-अपने देश की जनता को पड़ोसी देशों के खिलाफ भड़का कर अपने साथ रखना चाहते हैं. अब जनता पर यह निर्भर करता है कि, जनता को अपने बच्चों के लिए अपने परिवार के लिए रोजगार चाहिए, आर्थिक विकास चाहिए या फिर भाषणों के दम पर जिंदा रहना है और पड़ोसी देशों की बर्बादी से ही अपने बच्चों का भविष्य उज्जवल करना है?

प्रधानमंत्री मोदी जब विपक्ष में थे और गुजरात के मुख्यमंत्री थे,महंगाई पर उस समय की मौजूदा सरकार की खूब आलोचना करते थे. प्याज के बढ़ते दामों पर तंज कसते थे.

कहते थे क्या प्याज को लॉकर में रखे? क्या रोटी के साथ प्याज़ को सूँघें? क्यों सरकार ने रोटी-प्याज़ को छीन लिया? क्यों जनता को प्याज़ के आँसु रुलाया? इसी तरह के तंज कस के जनता को सरकार के खिलाफ भड़काने का काम करते थे, लेकिन आज प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं, रुपया डॉलर के सामने धराशाई है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी आज भी सिर्फ भाषण देकर जनता का मनोरंजन कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान और आतंकवाद को भाषण में मुख्य जगह दे रखी है सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान और आतंकवाद के नाम पर जनता के जरूरी मुद्दों को डायवर्ट करने की कोशिश कर रहे हैं. 2014 से पहले जिन मुद्दों पर उस समय की सरकार को कटघरे में खड़ा करते थे, आलोचना करते थे, आज उन मुद्दों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छूना पसंद नहीं करते हैं.

यह भी पढ़े : अमेरिका को,ट्रंप को सर्वे-सर्वा समझने से किसे फायदा हुआ,मोदी को या इमरान को?

Thought of Nation राष्ट्र के विचार
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