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क्या सच में कांग्रेस विचारधारा की लड़ाई जमीन पर भाजपा से हार रही है ?

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आज चारों तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बोलबाला है उनकी पार्टी भाजपा का बोलबाला है तो क्या इसका मतलब कांग्रेस सच में खत्म हो चुकी है ?

नहीं मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानता कांग्रेस चुनाव नहीं जीत रही है, लेकिन भाजपा के सामने मजबूती के साथ टिकी हुई है. भाजपा को हर मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक और कोर्ट तक कोई चुनौती दे रहा है तो वह सिर्फ कांग्रेस है. सच यह है की पुरे विपक्ष से कम वोट पाने के बाद भी भाजपा नंबर 1 है, सिर्फ जनता के बिकराव के कारण.

पंडित नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से लेकर डॉ मनमोहन सिंह तक जितने भी प्रधानमंत्री कांग्रेस की तरफ से देश के रहे हैं उनमें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में सिर्फ एक अंतर है. कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने अपने काम के दम पर देश और दुनिया में नाम कमाया, कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों को अपनी नाकामी को छुपाने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि उन्होंने काम किया था. कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों को जनता के टैक्स का पैसा विकास कार्यों में न लगाकर अपने प्रचार में लगाने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि उन्होंने काम किया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 6 साल से मीडिया में बने हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो भी बनावटी शख्सियत गढ़ी गई है, वह पैसों के दम पर और मीडिया के दम पर ही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही पैसों के दम पर अपनी पार्टी का और खुद का प्रचार करवा कर अपने आप को देश का बड़ा नेता घोषित कर चुके हैं, लेकिन निसंदेह उन्हें अकेले में शर्म आती होगी खुद पर. कभी वह अकेले में कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों की तुलना खुद से करते होंगे तो खुद पर आ रही शर्म उन्हें सोने नहीं देती होगी.

आज कांग्रेस कमजोर हुई है तो उसका सबसे बड़ा कारण यही है कि जनता के टैक्स के पैसे से प्रधानमंत्री मोदी ने और भाजपा ने मीडिया को खरीद के कांग्रेस को जनता के सामने विलेन साबित किया हुआ है. मौजूदा मीडिया भाजपा की प्रचार एजेंसी की तरह काम कर रही है. मीडिया मैनेजमेंट के दम पर भाजपा ने खुद को देश की सबसे बड़ी और मजबूत पार्टी साबित किया हुआ है. मीडिया मैनेजमेंट का ही कमाल है कि भाजपा के इशारे पर मीडिया ने कांग्रेस को बदनाम किया हुआ है, कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी साबित किया हुआ है.

जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस न ही मुसलमानों की पार्टी है न ही हिंदुओं की पार्टी है न ही किसी दूसरे धर्म के लोगों की पार्टी है. कांग्रेस इस देश की पार्टी है और इस देश में हर जाति हर धर्म के लोग रहते हैं. कांग्रेस ने हमेशा सभी धर्मों के लोगों की, सभी जाति के लोगों की बात की है.अभी नागरिकता संशोधन बिल पास किया गया है जिसका कांग्रेस ने पुरजोर विरोध किया है, संसद के अंदर. लेकिन कांग्रेस की कमजोर स्थिति के कारण और क्षेत्रीय दलों की मौका परस्ती के कारण भाजपा ने यह बिल पास करवा लिया. इस बिल के पास होने के बाद भाजपा की प्रचार एजेंसी मीडिया लोगों के सामने इसे ऐसे प्रस्तुत कर रही है जैसे देश ने नया इतिहास रच दिया. प्रचार ऐसे किया जा रहा है जैसे दुनिया भर के हिंदुओं को प्रधानमंत्री मोदी ने खुशियां दे दी है.

यह भी पढ़े : वजह क्या है की AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी 2014 के बाद लगातार कांग्रेस पर हमलावर है ?

जबकि सच्चाई यह है कि इस बिल का विरोध कांग्रेस ने सिर्फ इसलिए किया था कि बिल को एक धर्म से जोड़ कर प्रचारित किया जा रहा था और एक धर्म के विरोध में प्रचारित किया जा रहा था. कांग्रेस का कहना था कि, सभी धर्मों के लोगों को शामिल किया जाना चाहिए और इसी को लेकर मीडिया द्वारा ऐसा प्रचार किया जा रहा है जैसे कांग्रेस इस बिल का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि इसमें हिंदुओं को शामिल किया गया है और मुसलमानों को नहीं. मुझे लगता है इस बिल का देश की जनता से कोई लेना-देना नहीं है. मौजूदा वक्त में देश में बेरोजगारी अपने चरम पर है. पिछले 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है. अगर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू भारत में रहने के लिए आते भी हैं, उन्हें नागरिकता दी भी जाती है तो उनके रोजगार की गारंटी कौन लेगा ? वह अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेंगे ? बात अगर भाजपा के हिसाब से सिर्फ हिंदुओं की ही की जाए जैसा कि प्रचारित किया जा रहा है, देश के अंदर हिंदुओं को रोजगार नहीं मिल रहा है फिर बाहर से आए हिंदुओं को रोजगार कहां से मिलेगा या फिर सिख और ईसाई को रोजगार कहां से मिलेगा ? नागरिकता देने भर से ही जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?

सच्चाई यह है कि आज देश में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, देश की अर्थव्यवस्था जमीनोंजद हो चुकी है, देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है कांग्रेस की 70 सालों के मेहनत से जो सरकारी कंपनियां तैयार हुई थी जिनसे सरकार को लाभ हो रहा था मौजूदा सरकार उन कंपनियों को उद्योगपतियों के हवाले कर रही है, सस्ते दामों में उन्हें बेच रही है. देश की मौजूदा हालत दयनीय बनी हुई है और आने वाले हैं लगभग 1 साल में जनता सड़कों पर इस सरकार का विरोध करती हुई नजर आएगी.

हम बात कर रहे थे कॉन्ग्रेस क्या सच में कमजोर हो गई है और भाजपा मजबूत हुई है?

कांग्रेस की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण क्षेत्रीय दल है. क्षेत्रीय दल संविधान के नाम पर, बाबा साहब अंबेडकर के नाम पर, जाति के नाम पर, धर्म के नाम पर जनता का वोट लेते हैं. कहीं वह जीत जाते हैं तो ज्यादातर जगह पर हार जाते हैं. लेकिन जो भी उनको वोट मिलता है वह कभी ना कभी कांग्रेस का वोट बैंक हुआ करता था, लेकिन अब इन क्षेत्रीय दलों को मिलने लगा है इसका नतीजा यह हुआ है कि कांग्रेस भी वहां नहीं जीत पाती क्षेत्रीय दल भी नहीं जीत पाते और वोट बट जाने के कारण भाजपा अपने वोट बैंक के दम पर वह सीटें निकाल ले जाती है.

कांग्रेस को अगर फिर से मजबूत होना है जमीन पर तो सबसे पहले कांग्रेस को मीडिया पर अंकुश लगाना होगा, मीडिया के खिलाफ हल्ला बोल करना होगा. मीडिया के खिलाफ सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करना होगा. कांग्रेस को मीडिया के खिलाफ लड़ाई तब तक जारी रखनी होगी जब तक मीडिया खुद यह ना बोल दे कि हां वह भाजपा की प्रचार एजेंसी बनकर ही काम करेगी, देश के अंदर मीडिया है नहीं देश के अंदर मीडिया अब भाजपा की प्रचारक बन चुकी है या फिर मीडिया माफी मांग कर निष्पक्ष ना हो जाए.

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आज देश के एक मीडिया चैनल पर इस मुद्दे पर बहस हुई है और कार्यक्रम की हेड लाइन से ही पता चलता है कि कांग्रेस को किस तरीके से जनता की नजर में विलेन साबित किया जा रहा है. कांग्रेस को इस मुद्दे पर सोचना होगा.

इसके अलावा जो जनता भ्रमित हो चुकी है क्षेत्रीय पार्टियों के चक्कर में या फिर क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं के चक्कर में या फिर धर्म जाति के नाम पर वोट लेने वाले नेताओं के चक्कर में उस तक पहुंच भी कांग्रेस को बनानी पड़ेगी, क्योंकि यह क्षेत्रीय दल अधिकतर जगह पर अगर कोई बिल संसद में पास होता है तो जनता का वोट तो ले लेते है, कई जगह पर सांसद और विधायक भी अपने बनवा लेते हैं, लेकिन जब भाजपा के खिलाफ वोटिंग की बारी आती है तो वकआउट कर जाते हैं. इसका मतलब यही हुआ कि भाजपा को समर्थन कर जाते हैं और जनता हाथ मलती हुई रह जाती है.

जनता को समझना होगा कि जो मौकापरस्त क्षेत्रीय दल है अगर उन के चक्कर में अपना वोट जाया किया तो भाजपा ऐसे ही मजबूत बनी रहेगी और कांग्रेस कमजोर होती जाएगी. कांग्रेस ने लाख गलतियां की होंगी, लेकिन कांग्रेस ने सबको साथ लेकर हमेशा चलने का काम किया है. जरूरी नहीं है कि हर किसी को खुश किया जा सके, लेकिन कांग्रेस ने देश के अंदर रह रहे हर जाति धर्म के लोगों के लिए नीतियां बनाई है और कहीं ना कहीं उनके लिए फायदा पहुंचाने का भी काम किया है. कांग्रेस की सरकारें जब-जब रही हैं धर्म और जाति के नाम पर इतनी अधिक नफरत देश में नहीं रही है, जैसी मौजूदा समय में है.

कुछ मुस्लिम युवा ओवैसी को पसंद करते हैं ओवैसी ने संसद में नागरिकता संशोधन बिल की कॉपी को फाड़ा दिया, यह देखकर मुस्लिम युवा खुश हो गए और कह रहे हैं कि ओवैसी ने संसद में बिल को फाड़ा लेकिन क्या बिल को फाड़ देना ही समस्या का समाधान है ? भाजपा बिल पास करती रहे और ओवैसी कांग्रेस का वोट काट के हर जगह हारते रहे दो चार जगह जीतने के बाद संसद में कौम के युवाओं को पसंद आने वाला भाषण देते रहे और भाजपा अपनी वाली करती रहे क्या यही चाहते हैं मुस्लिम युवा?

ओवैसी पढ़े लिखे हैं वकालत भी की है लेकिन रैलियों में भड़काऊ भाषण देने के अलावा और संसद के अंदर मुस्लिम युवाओं को पसंद आने वाला भाषण देने के अलावा, ओवैसी ने पूरे देश में मुसलमानों के लिए किया क्या है ? माना उनकी सरकार नहीं रही कभी, इसलिए वह कुछ नहीं कर पाए, लेकिन कांग्रेस की भी सरकार नहीं है अभी, कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक और कोर्ट तक भाजपा को चुनौती दे रही है.

लेकिन ओवैसी की चुनौती सिर्फ भाषणों तक ही सीमित क्यों है ? क्या कभी सोचा है इस बारे में मुस्लिम युवाओं ने ? ओवैसी सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहे हैं सरकार का ? मुस्लिम युवाओं का साथ क्यों नहीं ले रहे हैं भाजपा का विरोध करने के लिए ? कोई धरना कोई आंदोलन क्यों नहीं कर रहे हैं ओवैसी ? सुप्रीम कोर्ट तक भाजपा को क्यों नहीं खींच रहे हैं ओवैसी ? भाषण देने से ओवैसी जिस धर्म की राजनीति करते हैं उस धर्म के लोगों का भला होगा ?

कांग्रेस ने हमेशा जनता की सुनी है. महाराष्ट्र में कांग्रेस शिवसेना के साथ गठबंधन नहीं चाहती थी, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक दूसरी पार्टियों के समर्थकों का और खुद कांग्रेस के समर्थकों का भारी दबाव था कि कांग्रेस शिवसेना के साथ गठबंधन करें ताकि भाजपा को सत्ता से दूर रखा जा सके, उसके बाद कांग्रेस ने शिवसेना से गठबंधन किया जनता की मर्जी से, लेकिन शिवसेना ने नागरिकता संशोधन बिल पर सबसे पहले लोकसभा में समर्थन किया और राज्यसभा में वाकआउट कर दिया, इसमें कांग्रेस की कोई भी गलती नहीं है.

कॉन्ग्रेस भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए जनता जो भी चाह रही है, कांग्रेस वह कर रही है, लेकिन कांग्रेस को जनता का पूरा साथ नहीं मिल रहा है. जनता को समझना होगा क्षेत्रीय दलों को वोट देने से भाजपा कमजोर नहीं होगी क्षेत्रीय दलों को वोट देने से भाजपा मजबूत होगी. जब-जब कांग्रेस कमजोर होगी भाजपा मजबूत होगी और क्षेत्रीय दल समय आने पर भाजपा के हाथों बिक जायेंगे .

जनता अगर क्षेत्रीय दलों की मौकापरस्ती को समझ जाए और कॉन्ग्रेस मीडिया के खिलाफ सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे तो सब कुछ ठीक हो सकता है बस प्रयत्न करने की जरूरत है.

यह भी पढ़े : भाजपा के नेता हिंदुत्व के नाम पर शिवसेना को तंज कस रहे हैं,कौन से हिंदुत्व की बात कर रहे हैं

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