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Home News अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी कहा भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी कहा भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता

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प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार के साथ-साथ भाजपा नेताओं के दावे कुछ भी हो, मीडिया भले सवाल न पूछे सरकार से, अर्थव्यवस्था को लेकर लेकिन सच यही है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी के भंवर में घूम रही है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी (आईएमएफ) ने भी कह दिया है कि भारत का विकास अनुमान से काफी कमजोर है.

आईएमएफ ने अपने ताजा बयान में कहा है कि भारत का विकास काफी कमजोर गति से हो रहा है. इसी वजह से पर्यावरण और कॉरपोरेट्स के मामले में अनिश्चितता है. अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2019 और 2020 के दौरान भारत के सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर में 0.3% की गिरावट दर्ज की जाएगी.

आईएमएफ (IMF) के प्रवक्ता जेरी राइस ने कहा है कि, हमें जल्द ही नए आंकड़े मिल जाएंगे, लेकिन भारत का विकास अनुमान से काफी कम रहा है और उसकी मुख्य वजह कारपोरेट और पर्यावरण से जुड़े मामलों को नियंत्रित करने वाली एजेंसियों की अनिश्चितता और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की कमजोरी है.

गौरतलब है कि देश के अंदर आर्थिक अव्यवस्था का वातावरण बना हुआ है. देश में तकरीबन हर क्षेत्र में मंदी का असर साफ देखने को मिल रहा है

विपक्ष लगातार आर्थिक मंदी को लेकर सरकार से सवाल कर रहा है. सरकार की नीतियों को विपक्ष आर्थिक मंदी के लिए जिम्मेदार बता रहा है. रोजगार के नए अवसर पैदा नहीं हो रहे है. जिन लोगों के पास रोजगार है, उनमें से भी ज्यादा लोगों पर रोजगार छिन जाने का संकट पैदा हो गया है.कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की छटनी कर रही हैं.

अभी हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में जारी मंदी के लिए ओला और उबर को जिम्मेदार बता दिया था. उनका कहना था कि आज के युवा नई कार खरीदने की जगह, मासिक ईएमआई (EMI) भरने की जगह, ओला और उबर से सफर करना सही समझ रहे हैं, इसी कारण ऑटो सेक्टर में मंदी छाई हुई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान की खूब आलोचना हुई है.

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पूरे देश में आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है, लेकिन सरकार इससे निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाती हुई नहीं दिख रही है.सरकार के नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं संबंधित मामलों के मंत्री लगातार बयान बाजी कर रहे हैं.कोई यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि देश में मंदी का दौर है और इस मंदी का असर जनता पर पड़ रहा है.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने तो मंदी का मजाक उड़ाते हुए उसको देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस से जोड़ दिया और कहा कि देश में कहीं भी आर्थिक मंदी नहीं है. मंदी सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस के अंदर है.कांग्रेस के लिए फंड इकट्ठा करने वाले नेता जेल के अंदर है इसी कारण कांग्रेस आर्थिक मंदी का राग अलाप रही है.

हालांकि आर्थिक मंदी का असर सबसे ज्यादा ऑटो सेक्टर में देखने को मिल रहा है.ऑटो सेक्टर को लेकर सरकार की तरफ से दिए जा रहे बयान तथ्यहीन है.सरकार के पास इस आर्थिक मंदी से निपटने के लिए कोई विजन दिखाई नहीं दे रहा है. भाजपा के नेता आर्थिक मंदी से जनता का ध्यान हटाने के लिए विपक्ष के नेताओं का मजाक उड़ा रहे हैं, विपक्षी पार्टियों का मजाक उड़ा रहे हैं. हमारी मेंस्ट्रीम मीडिया सरकार से, प्रधानमंत्री से और भाजपा के नेताओं से सवाल नहीं पूछ रही है. मीडिया पूरे देश का ध्यान आर्थिक मंदी से हटाने के लिए लगातार पाकिस्तान,इमरान खान और हिंदू मुसलमान पर डिबेट करा रही है.

देश में जो आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है,उसका सीधा असर जनता पर, जनता के परिवार पर , परिवार की जरूरतों पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. इसको सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया तो इसके परिणाम काफी भयावह हो सकते हैं.आर्थिक मंदी की मार से जनता पहले ही परेशान है और उसके बाद देश में महंगाई का दौर भी अपने चरम पर है.

सरकार को इन परिस्थितियों को गंभीरता से लेना चाहिए, और जनता के हित में फैसले लेने चाहिए. इस आर्थिक मंदी के दौर में मीडिया को भी सरकार से जरूरी सवाल करने चाहिए और सरकार पर दबाव बनाना चाहिए ताकि सरकार आर्थिक मंदी से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति बनाएं.

नए रोजगार देने में यह सरकार बुरी तरीके से विफल हुई है . यह सरकार अभी तक सिर्फ और सिर्फ प्रचार के दम पर चलती हुई दिखाई दे रही है. सरकार की योजनाएं सिर्फ प्रचार तक सीमित है. सरकार को प्रचार से आगे बढ़कर जनता तक पहुंच कर जनता को सुविधाएं देने के बारे में सोचना होगा तब इस समस्या से निपटा जा सकता है

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