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महाराष्ट्र चुनाव भाजपा शिवसेना और मोदी ब्रांड के आगे कांग्रेस एनसीपी कितनी मजबूत?

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महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन पिछले 5 साल से सत्ता में है. कुछ समय पहले खबरें आ रही थी कि,टिकट बंटवारे को लेकर शिवसेना और भाजपा में तल्खी है और दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ सकते हैं,लेकिन अब सब कुछ साफ हो चुका है, शिवसेना और भाजपा दोनों साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी.

2014 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव टिकट बंटवारे को लेकर  हुई तनातनी के बाद शिवसेना और भाजपा ने अलग-अलग लड़ा था.उस समय भाजपा ने 122 और शिवसेना ने 63 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी,हालांकि चुनाव के बाद दोनों के बीच गठबंधन हो गया था.

इस बार का चुनाव दोनों पार्टियां साथ मिलकर लड़ रही है.इस बार महाराष्ट्र चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने बड़े पैमाने पर दूसरी पार्टियों के जीते हुए विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल किया है. शिवसेना ने भी दूसरे दलों के जीते हुए विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करवाया है. दोनों पार्टियों के हौसले चुनाव से पहले बुलंद है,दोनों पार्टियां जीत के दावे और दोबारा सरकार बनाने के दावे कर रही है.

उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र लोकसभा सीटों के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा राज्य है.लोकसभा में यहां 48 और विधानसभा में 288 सीटें हैं,लोकसभा 2019 के चुनाव नतीजों के हिसाब से अगर देखा जाए तो महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन भारी बढ़त बनाता हुआ दिख रहा है.

लोक सभा 2019 के चुनाव परिणामों से उत्साहित भाजपा शिवसेना का गठबंधन महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिशन 220 प्लस का नारा दे रहा है. देश के अंदर जिस तरीके से राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव लड़ा जा रहा है जनता जिस तरीके से भाजपा के मुद्दों पर भाजपा को और उसकी सहयोगी पार्टियों को समर्थन दे रही है उसको देखते हुए भाजपा और शिवसेना का दवा मुश्किल नहीं लग रहा है.

गठबंधन के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस महा जनादेश यात्रा के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं और समर्थन मांग रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी महाराष्ट्र में चुनावी रैली कर चुके हैं.

बात अगर कांग्रेस एनसीपी गठबंधन की करें तो,इसमें निराशा साफ झलक रही है. दोनों ही पार्टियों में भगदड़ मची हुई है,दोनों ही पार्टियों के नेता और कुछ जीते हुए विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं और भाजपा या फिर शिव सेना ज्वाइन कर चुके हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में कांग्रेस को 2 सीटों पर जीत मिली थी,लेकिन इस बार सिर्फ एक सीट पर जीत मिली है.वहीं एनसीपी को इस बार सिर्फ 4 सीटों पर जीत हासिल हुई है. कांग्रेस की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता अशोक चव्हाण भी 2019 का लोकसभा चुनाव हार गए थे.

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करके लोकसभा का चुनाव लड़ने वाली फिल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर,कांग्रेस पार्टी छोड़ चुकी है. पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने मुंबई कांग्रेस पर कई तरह के आरोप लगाए और पार्टी में गुटबाजी चरम पर है,इस बात का जिक्र किया.

उर्मिला मातोंडकर के पार्टी छोड़ने के बाद हीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम और मिलिंद देवड़ा की गुटबाजी पूरी तरीके से सामने हो चुकी है.

कांग्रेस और एनसीपी के बीच महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों का बंटवारा हो चुका है. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि,कांग्रेस और एसपी 125-125 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इसके अलावा बची हुई 38 सींटे सहयोगियों के लिए छोड़ी गई है.

जिस तरीके से कांग्रेस एनसीपी में भगदड़ मची हुई है,सहयोगीयों में भगदड़ मची हुई ह, जिस तरीके की गुटबाजी देखने को मिल रही है महाराष्ट्र कांग्रेस के अंदर, उसको देखते हुए चुनाव में भाजपा शिवसेना के गठबंधन को टक्कर देना इनके लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है.

चुनाव में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन को टक्कर देने के लिए सबसे पहले कांग्रेस को आपसी गुटबाजी को खत्म करना होगा जो खत्म होती हुई दिखाई नहीं दे रही है. कांग्रेस के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, एक दूसरे को ऊपर उठता हुआ देखना नहीं चाहते हैं.

कांग्रेस के अंदर महाराष्ट्र में भी कई गुट बने हुए हैं. कई नेता खुद को मुख्यमंत्री के रूप में देख रहे हैं. जब तक कांग्रेस आपसी और अंदरूनी समस्याओं से पार नहीं पा लेती तब तक, महाराष्ट्र चुनाव जीतना काफी मुश्किल है कांग्रेस और एनसीपी के लिए.

यह भी पढ़े : हताशा और हार के सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस

राष्ट्र के विचार

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