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जलवायु परिवर्तन कैसे हमारे निवाले को बना रहा जहरीला

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जयपुर.
वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के कारण गेहूं और चावल सहित अन्य खाद्य फसलें कम पौष्टिक और गुणवत्ता वाली हो सकती हैं, जो दुनिया में करोड़ों लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं। जर्नल नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़े स्तर के साथ खुले खेतों में उगाई गई प्रमुख फसलों में प्रोटीन, लोहा और जस्ते का स्तर 27 फीसदी तक कम पाया गया। बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड का वैश्विक उत्सर्जन भी बढ़ गया, जिससे वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि हुई है।
शोध में पाया गया है कि यदि जलवायु परिवर्तन ऐसे ही हमारे निवाले से पौष्टिकता खींचता रहेगा तो 2050 तक लगभग 30 करोड़ लोग पर्याप्त प्रोटीन और जस्ते की कमी से जूझ रहे होंगे तो करीब 104 करोड़ महिलाएं और बच्चे आयरन की कमी की चपेट में आ जाएंगे। ये सभी कार्बन उत्सर्जन के खतरे हैं। अध्ययनकर्ता मैथ्यू स्मिथ ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग से सूखे और बाढ़ जैसे हालात पैदा होंगे, जो खाद्य उत्पादन पर असर डालेंगे। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक पिछले वर्ष कार्बन उत्सर्जन 32.5 गीगा टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

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