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गृह मंत्री शाह फिर कुछ ऐसा बोल गए जिससे कई सवाल पैदा हो गए

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देश की कई जानी-मानी हस्तियों के अलावा आम जनता भी किसान आंदोलन के समर्थन में टूलकिट मामले को लेकर दिशा रवि की गिरफ्तारी पर सवाल उठा रही है. इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल पूछा गया, जिसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि आखिर इसमें गलत क्या है?
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति क्राइम करता है तो उसकी उम्र पूछी जानी चाहिए क्या? उसका प्रोफेशन पूछा जाना चाहिए? क्या वह किससे जुड़ा है यह पूछा जाना चाहिए क्या या फिर गुनाह किया है या नहीं किया है उसके आधार पर तय होगा. मीडिया चैनल एबीपी के कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि अगर कल को कोई कुछ कर देता है… बड़ा गुनाह कर देता है और मानो वह कुछ भी है तो ऐसा कहना चाहिए कि क्यों राजनेताओं पर किया है, प्रोफेसरों पर किया है, क्यों किसानों पर किया है.
केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाया कि ऐसा करेंगे क्या? अमित शाह ने कहा कि यह क्या नया तरीका निकाल लिया है, जेंडर प्रोफेशन और उम्र इसके आधार पर तय होगा कि एफआईआर होगी या नहीं? अमित शाह ने कहा कि इस देश में अदालत है या नहीं अगर गलत एफआईआर है तो आप उसे खारिज कराने के लिए अदालत जा सकते हैं. अमित शाह ने कहा कि 21-22 साल के कितने युवा होंगे जो गिरफ्तार होते होंगे तो फिर एक खास मामले को क्यों उठाया जा रहा है?
उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के पास कुछ सबूत होंगे, शाह ने मीडिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मीडिया भी इसमें लग जाता है. कोई पूछे तो सिर्फ आप ही क्यों देश में 21 साल की कितनी बच्चियां है, उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस पेशेवर तरीके से अपना काम कर रही है. हो सकता है कि असेसमेंट में गलती हो मुझे मालूम नहीं. हालांकि गलती होने की संभावना कम है, क्योंकि यह संवेदनशील मामला है, लेकिन उसके खिलाफ अदालत तो खुली है.
केंद्रीय मंत्री अमित शाह से कुछ सवाल
अमित शाह बताएंगे कि सिर्फ भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले, आलोचना करने वाले ही क्राइम कर रहे हैं? क्योंकि पिछले 6-7 साल में ऐसे मामले बिल्कुल भी नहीं देखे गए, जो सत्ता पक्ष के समर्थक रहे हो और उनके खिलाफ केंद्र की अधीन आने वाली पुलिस ने कोई कार्यवाही की हो या फिर एफआईआर की हो. टूल किट केस में जो एफआईआर और गिरफ्तारी हुई है, ऐसी ही टूलकिट तैयार करने के लिए तो खुद अमित शाह ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को मौखिक तौर कहा था.
तो क्या उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी कोई जांच होगी? क्योंकि उसमें हंसाने के साथ-साथ डराने वाली चीजों को भी डालने के लिए कहा गया था. उसमें क्या-क्या डाला जा रहा है, किस तरीके की तैयारी हो रही है? उसमें क्या सच है, क्या झूठ है? उसके बारे में तो जनता जानती ही नहीं है, तो फिर पुलिस क्या पहले इसकी तहकीकात करेगी? केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सवाल उठाना नया फैशन बन गया है. तो क्या अमित शाह यह बताएंगे कि आज के न्यू इंडिया में सरकार से सवाल करना, सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों के साथ खड़े होना गुनाह है?
ऐसा करने वालों पर पहले एफआइआर और गिरफ्तारी हो जाएगी उसके बाद जांच बाद में होगी? सुशांत सिंह राजपूत के मामले पर भी मीडिया ट्रायल किया गया. बड़े-बड़े भाजपा के नेताओं ने रिया चक्रवर्ती को अपराधी घोषित कर दिया. अपनी तरफ से पुलिस ने भी गिरफ्तारी कर ली. तमाम तरह की जांच हुई, लेकिन आज रिया जेल से छूट चुकी है. लेकिन जितनी प्रताड़ना रिया ने पिछले कुछ महीनों में झेली है वह उसे वापस कौन करेगा?
क्या यही न्यू इंडिया है कि, पहले मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए एफआईआर और गिरफ्तारी करवाओ, कुछ दिन उस पर मीडिया ट्रायल करवाओ. उसको अपराधी घोषित करवा दो, उसको मानसिक रूप से पूरी तरीके से प्रताड़ित और कमजोर कर दो और बाद में उसे अदालत छोड़ देगी और उसके बाद उस मुद्दे को छूने वाला, माफी मांगने वाला तक कोई नहीं मिलेगा? पिछले कुछ समय में देखा गया है कि विपक्षी नेता हो या सरकार की आलोचना करने वाला हो, केंद्र की जांच एजेंसियां उस पर खूब कार्यवाही करती है. छापे डालती हैं, एफआईआर होती है गिरफ्तारी तक होती है.
लेकिन सत्ताधारी पार्टी के साथ खड़े हुए लोगों के खिलाफ ऐसी कोई कार्यवाही केंद्रीय जांच एजेंसियां नहीं करती. सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के खिलाफ ऐसी कोई कार्यवाही केंद्रीय जांच एजेंसियों की तरफ से नहीं होती. तो क्या अमित शाह ऐसा कहना चाहते हैं कि, सत्ता के साथ खड़े हुए लोग, सत्ताधारी पार्टी के नेता बिल्कुल भी गलत नहीं है? वह गंगा जल से धुले हुए हैं? कार्यवाही सिर्फ आलोचना और विरोध करने वालों के खिलाफ होगी? करवाई सिर्फ माहौल बनाने के लिए होगी? कार्यवाही विरोध करने वालो के साथ खड़े होने पर होगी?
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