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लोगों का उपचार करते-करते खुद बीमार हो गया…

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Didwana Roadways bus Accident News डीडवाना. मैं बांगड़ अस्पताल हूं, केवल डीडवाना शहर ही नहीं बल्कि आसपास के अनेक ग्राम और ढाणियों के लोग मुझसे स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हैं। मेरे यहां 3 बेड की क्रमिक घोषणा के बाद 2 सौ बेड की स्वीकृति है। सैकड़ों-हजारों को स्वास्थ्य लाभ मिलने की आस में हूं, लेकिन अब जब मैं स्वयं बीमार हूं तो किस तरह से रोगियों का उपचार करूं। जी हां पढऩे-सुनने में भले ही यह अजीब लगे पर यह सच है, बांगड़ अस्पताल जिसकी 3 सौ बेड की क्रमिक घोषणा के बाद 2 सौ बेड की स्वीकृति मिली। वहां फिलहाल में 100 बेड की ही व्यवस्था है। 40 बेड के दो वार्ड बनकर तैयार है, लेकिन बीच मे क्षतिग्रस्त रैम्प के नवीनीकरण के इंतजार में इन वार्डों का लाभ रोगियों को नहीं मिल पा रहा है। यहां 60 बेड के लिए वार्ड का निर्माण होना भी अभी बाकी है। ऐेसे में अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल होने वाले कई रोगियों को गलियारों मे बेड लगाते हुए उपचार सुविधा दी जा रही है। ऐसे में न केवल बीमार को वार्ड का वातावरण मिल पाता है बल्कि अव्यवस्था से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। अस्पताल में चिकित्सकों सहित कई प्रमुख पद भी रिक्त है, जिसके चलते भी रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर नि:शुल्क होने वाली कई प्रमुख जांच सुविधा भी बंद हो चुकी है। अस्पताल के बारे में उक्त जानकारी मिलने के बाद बुधवार को पत्रिका की टीम बांगड़ अस्पताल पहुंची।
अस्पताल में केवल 100 बेड की व्यवस्था Parking Problem News in Riyan Bari2 सौ बेड की स्वीकृति वाले बांगड़ अस्पताल मे महज 100 बेड की व्यवस्था है। यहां संचालित मेडिकल, सर्जिकल, गायनिक व शिशु रोग वार्ड मे कुल 100 बेड की ही व्यवस्था है। दो नए वार्ड अस्पताल में बनकर तैयार है, जिनमें 40 बेड की व्यवस्था है। लेकिन नवनिर्मित इन वार्डों को भी अभी शुरू नहीं किया जा सका है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नवीन वार्ड छत पर बने है जिस पर जाने वाले क्षतिग्रस्त रैम्प का निर्माण होना बाकी है, रैम्प निर्माण के बाद ही वार्डों को शुरू करना ठीक रहेगा। जानकारी के अनुसार यहां अब 60 बेड के लिए तीन और वार्डों का निर्माण भी किया जाना है। कुल मिलाकर पर्याप्त वार्ड सुविधा वर्तमान में नहीं होने से रोगियों को अस्पताल के गलियारों मे लेट कर उपचार प्राप्त करना पड़ रहा है।
रिक्त पदों के चलते रोगी व अस्पताल प्रशासन परेशान Farmer Newsअस्पताल में स्वास्थ्य लाभ लेने आने वालों को उचित परामर्श व अन्य चिकित्सकीय सुविधाएं मिले इसके लिए कई प्रमुख पद यहां पर स्वीकृत हैं। लेकिन लगभग आधे पदों के रिक्त होने से लोगों को सुविधाएं प्राप्त करने मे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार अस्पताल मे वरिष्ठ विशेषज्ञ के 6 स्वीकृत पदों में से 6 , कनिष्ठ विशेषज्ञ 17 स्वीकृत पद में से 8 , चिकित्सा अधिकारी के 17 स्वीकृत पदों में से 7, उपनियंत्रक का स्वीकृत 1 पद, अति.प्रशासनिक अधिकारी का स्वीकृत 1 पद, सहा.प्रशासनिक अधिकारी का सवीकृत 1 पद, सहा. लेखाधिकारी द्वितीय का स्वीकृत 1 पद, कनिष्ठ लेखाकार के स्वीकृत 2 मे से 1 पद, फिजियोथैरेपिस्ट का स्वीकृत 1 पद, अधीक्षक रेडियोग्राफर का स्वीकृत 1 पद, सहायक रेडियोग्राफर के स्वीकृत 4 मे से 2 पद, वरिष्ठ तकनीकी सहायक का 1 पद, तकनीकी सहायक के 3 पद, डेन्टल टेक्निशियन का 1 पद, वरिष्ठ लेब टेक्निशियन के 3 पद, लेब टेक्निशियन के 6 मे से 2 पद, नर्सिंग अधीक्षक का 1 पद, नर्स श्रेणी प्रथम के 10 मे से 2 पद, नर्स श्रेणी द्वितीय के 51 मे से 17 पद, वार्ड बॉय के 19 मे से 8 पद, धोबी का 1 पद, स्वीपर के 7 मे से 2 पद, सहा. सांख्यिकी अधिकारी का 1 पद, फार्मासिस्ट के 8 मे से 2 पद, क्लिनिकल अभिलेख सहायक के 3 पद, प्रयोगशाला सहायक के 7 पद मशीन विद मैन का 1 पद यहां पर रिक्त है। ऐसे मे अस्पताल प्रशासन व रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बंद हुई प्रमुख जांचसरकार के एक निजी डायग्नोस्टिक सेन्टर के साथ अनुबंध समाप्त होने के बाद अस्पताल मे होने वाली कई प्रमुख जांचें भी 1 जुलाई से बंद हो गई है। जानकारी के अनुसार राजस्थान सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं कृष्णा डायग्नोस्टिक प्रा.लि. के संयुक्त गठबंधन के तहत संचालित नि:शुल्क जांच योजना की जांच लगभग दो माह से बंद है। ज्ञात है कि उक्त योजना के तहत एचबी एवन सी, लिपिड प्रोफाईल, यूरिन क्लचर एण्ड सेन्सीविटी, ब्लड क्लचर एण्ड सेन्सीविटी, डेंगू ऐलिसा टेस्ट, विटामिन डी लेवल, विटामिन बी 12 सहित कई प्रमुख जांच अस्पताल में नि:शुल्क की जा रही थी। अब अनुबंध समाप्त होने के बाद ऐसी कई प्रमुख नि:शुल्क जांच की सुविधा यहां बंद है।
इनका कहना हैदवाई तो पूरी है। जांच जो उपलब्ध है वो कर रहे हैं। रिक्त पदों से समस्या तो होती ही है। बेड तो पड़े हैं, लेकिन जगह नही है। दो वार्ड बन चुके है, तीन ओर बनने बाकी है। डॉ. जीके शर्मा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी

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