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महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के अरमानों पर सरकार की कैंची

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सीकर. कोरोना ने प्रदेश की दस लाख से अधिक महिलाओं को बड़ा झटका दिया है। पहले प्रदेश के सभी जिलों में स्वयं सहायता समूहों के जरिए पोषाहार बनाकर आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सप्लाई किया जा रहा था। लेकिन कोरोना के साए के साथ ही सरकार ने स्वयं सहायता समूहों के स्वावलम्बन पर नियमों की कैंची चला दी है। सरकार ने अब गर्भवती, धात्री व बच्चों को पोषाहार वितरण का जिम्मा रसद विभाग को दिया है। रसद विभाग की ओर से अब राशन डीलर के जरिए पोषाहार पहुंचाया जा रहा है। लेकिन रसद विभाग के पास पहले से लाखों उपभोक्ताओं का भार होने से उनका काम बढ़ गया है। ऐसे में वे बच्चों को समय पर पोषाहार नहीं पहुंचा पा रहे हैं। हालत यह है कि प्रदेशभर में अभी जनवरी से मार्च महीने का पोषाहार बांटा जा रहा है। सरकार के बदले हुए नियमों का खामियाजा बच्चों को भी भुगतना पड़ रहा है। समूहों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि सरकार नियमों में बदलाव करें तो आत्मनिर्भर बनने का सपना फिर से पूरा हो सकता है।सरकार का तर्क : केन्द्र बंद इसलिए किया नवाचारविभाग के अधिकारियों का तर्क है कि लॉकडाउन की वजह से प्रदेशभर में आंगनबाड़ी केन्द्र बंद है। ऐसे में बच्चे पोषाहार लेने के लिए केन्द्रों पर नहीं आ रहे हैं। इसलिए सरकार ने नवाचार करते हुए सूखी राशन सामग्री के पैकेट राशन डीलरों के पास भेजे हैं। एक्सपर्ट व्यू : दूसरी योजनाओं से ले सकती है एक करोड़ तक का लोनस्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से इंदिरा प्रियदर्शनी योजना शुरू की गई है। कम्प्यूटर सेंटर से लेकर अन्य ट्रेड के लिए महिलाएं दो लाख से एक करोड़ रुपए तक के लोन ले सकती है। इसके लिए सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जा रही है।-डॉ. अनुराधा सक्सेना, सहायक निदेशक, महिला अधिकारिताइन दो मामलों से समझें ‘आधी दुनिया’ की पूरी पीड़ाकेस 01 : कैसे चुकाएंगे बच्चों की फीससखी समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि कोरोनाकाल से पहले प्रति सदस्य दो हजार से अधिक की बचत हो जाती थी। अब सवा साल से पूरी तरह बेरोजगार है। सरकार को पुरानी व्यवस्था के तहत पोषाहार वितरण का काम शुरू करना चाहिए। यही सोचकर परेशान है कि इस साल बच्चों की फीस कैसे चुकाएंगे?केस 02: अचानक काम बंद होने से लाखों का नुकसानधोद इलाके में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार वितरण से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि सरकार के अचानक आदेश जारी करने से सभी स्वयं सहायता समूहों के पास रखी सूखी राशन सामग्री व अन्य सामान खराब होने की स्थिति में आ गए हैं। यदि सरकार ने समय रहते फैसला नहीं बदला तो लाखों का नुकसान होगा।फै क्ट फाइल प्रदेश में स्वयं सहायता समूह : 2.15 लाख से अधिकसमूह से जुड़ी महिलाएं: 10 लाख से अधिकशेखावाटी में जुड़ी महिलाएं: 70 हजार से अधिकसमूहों का कारोबार प्रभावित: 10 करोड़ से अधिक

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