- Advertisement -
Home News हिन्दू मुस्लिम एकता का विरोध करने वाले, दीनदयाल उपाध्याय जिसे मोदी जी...

हिन्दू मुस्लिम एकता का विरोध करने वाले, दीनदयाल उपाध्याय जिसे मोदी जी भारतीयो का आइकॉन मानते है, आइये जानते है उनके बारे में

- Advertisement -

दीनदयाल उपाध्याय 21 साल की उम्र में हीं अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन में संघ कार्यकर्ता और प्रचारक के तौर पर 1937 में सक्रिय हुए. इसके ठीक 10 साल बाद देश आजाद हुआ, लेकिन इन 10 सालों में आजादी की लड़ाई में अंग्रेजो के खिलाफ इनका कोई योगदान नहीं मिलता है.

देश की आजादी से लगभग 10 साल पहले ही यह संघ के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हो चुके थे. जिस तरीके से संघ का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं है, ठीक उसी प्रकार दीनदयाल उपाध्याय के साथ भी है, इनका भी आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं है. इन्होंने भी अपने देश की आजादी के बारे में सोचने के लिए समय नहीं निकाला.

2014 से ही जब से मोदी सरकार आई है उसी समय से दीनदयाल उपाध्याय को एक चर्चित चेहरा बनाने की कोशिश हो रही है सरकार की तरफ से. उनके तरह-तरह की योगदान सत्ताधारी पार्टी की तरफ से देश के लिए बताए जाते हैं, प्रधानमंत्री मोदी खुद बार-बार दीनदयाल उपाध्याय का नाम लेकर देश के लिए उनका योगदान बताते हैं.

जब देश आजादी की लड़ाई के लिए तूफानी संघर्ष कर रहा था, उस समय दीनदयाल उपाध्याय संघ के लिए सक्रिय हो चुके थे, वह समय भारतीय इतिहास का सबसे उथल पुथल भरा कालखंड था, उस समय लाखों-करोड़ों की तादात में जनता को ब्रिटिश हुकूमत ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के जुर्म में कालकोठरी में ठूंस दिया थ, प्रताड़ित किया था.

भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में हुआ था, यह आंदोलन इतना बेकाबू था कि ब्रितानिया हुकूमत हिल चुकी थी. भारत के कुछ हिस्सों में, कुछ समय के लिए ब्रिटिश हुकूमत का नियंत्रण समाप्त हो चुका था, उन दिनों देश के लाखों किसान, लाखों की तादाद में जनता कांग्रेस के नेतृत्व में अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूके हुए थी.

उस समय संघ के और मोदी जी के महान देशभक्त और विचारक दीनदयाल उपाध्याय और उनके जैसे तमाम प्रचारक और स्वयंसेवक इस झकझोर देने वाली देशभक्ति के दौर में कहां थे?

दीनदयाल उपाध्याय के चरित्रकार मोदी जी और तमाम संघ और भाजपा के नेता आजादी की लड़ाई के दौर में दीनदयाल उपाध्याय उस लड़ाई से दूर खड़े थे हिंदू और मुसलमान के बीच नफरत की दीवार खड़ी कर रहे थे, इस सच्चाई को रेखांकित क्यों नहीं करना चाहते?

दीनदयाल उपाध्याय इस देश में मुसलमानों को समस्या मानते थे और धर्मनिरपेक्षता को देश की आत्मा पर हमला मानते थे, दीनदयाल उपाध्याय का कहना था कि भारतीय राष्ट्रवाद हिंदू राष्ट्रवाद है और भारतीय संस्कृति हिंदू संस्कृति है.

दीनदयाल उपाध्याय ने हमेशा हिंदू मुस्लिम एकता का विरोध किया था धर्मनिरपेक्षता की हमेशा मुखालफत करते रहे.

मोदी सरकार लगातार देश के अंदर तमाम योजनाओं के नाम और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए दीनदयाल उपाध्याय का गुणगान करती रहती है, मन में कई सवाल उठते हैं कि दीनदयाल उपाध्याय ने इसलिए इसके लिए किया क्या है?

हिंदुत्व के नाम पर देश में नफरत की फसल बोने वाले यह हिंदुत्व के स्वयंभू रणबांकुरे संघ के गुरु गोलवलकर द्वारा तय की गई लाइन का ही अनुसरण करते रहे जो आजादी के आंदोलन से दूर थी. सच तो यह है कि संघ निष्क्रिय लोगों की संस्था है और दीनदयाल उसी संस्था के सदस्य थे.

दीनदयाल उपाध्याय ने आजादी की लड़ाई लड़ने वाले करोड़ों देशभक्तों और देश के लिए शहीद हुए, देश के लिए फांसी के फंदे को चूमने वाले और अपनी जान देने वाले सैकड़ों क्रांतिकारियों का अपमान किया था, दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि

आजादी का मतलब विदेशी शासन को उखाड़ फेंकना नहीं होता है विदेशी सरकार का विरोध का मतलब यह नहीं होता कि मातृभूमि के लिए आप सही मायने में प्यार करते हैं. दीनदयाल उपाध्याय ने इसके अलावा कहा था कि, देश के लोग गुमराह करने वाली धारणा का शिकार थे, उन दिनों एक अभियान चलाया गया कुछ लोगों द्वारा कि, ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जबरदस्त असंतोष पैदा किया जाए और इस देश के लोगों के सामने खड़ी हर समस्या और परेशानी के लिए ब्रिटिश हुकूमत को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाए.

हिंदू मुस्लिम एकता पर दीनदयाल उपाध्याय का नजरिया समस्याओं से ग्रस्त था, जिसके लिए महात्मा गांधी ने अपनी जान की बाजी लगा दी ऐसे लोगों को दीनदयाल उपाध्याय ने मुस्लिमपरस्त कह कर संबोधित किया था.

संघ के एक मुखपत्र राष्ट्रधर्म के ही एक लेख में दावा किया गया था कि दीनदयाल उपाध्याय हिंदू मुस्लिम एकता के खिलाफ थे और मानते थे कि यह मुसलमानों का तुष्टिकरण है.

डॉक्टर महेश चंद्र द्वारा लिखे गए इस लेख में यह भी दावा किया गया है कि, दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि मुसलमान होने के बाद कोई व्यक्ति देश का दुश्मन बन जाता है. इसके अलावा उसमें लिखा गया है कि, अगर देश का नियंत्रण उन लोगों के हाथ में है जो देश में पैदा हुए हैं मगर वह कुतुबुद्दीन, अलाउद्दीन, मोहम्मद तुगलक, फिरोजशाह तुगलक, शेरशाह, अकबर, औरंगजेब से अलग नहीं है तो, यह कहा जा सकता है कि उनके प्रेम के केंद्र में भारतीय जीवन नहीं है.

इसके अलावा भी मुसलमानों के एक जटिल समस्या होने की बात दीनदयाल उपाध्याय दोहराते रहते थे. आजादी के बाद भी उन्होंने कहा था कि सरकार राजनीतिक पार्टियां और लोगों को कई महत्वपूर्ण समस्याओं का सामना करना पड़ा है, इसके अलावा मुस्लिम समस्या इनमें सबसे पुरानी है और सबसे जटिल है, यह नए नए रूपों में हमारे सामने आती रहती है जो विगत 1200 सालों से हमारे सामने है.

दीनदयाल उपाध्याय ने जाति प्रथा के समर्थन में भी अजीबोगरीब तर्क दिए हैं.

दीनदयाल उपाध्याय का कहना था कि स्वधर्म का पालन ईश्वर पूजा के समकक्ष होता है, स्वधर्म की पूर्ति के लिए किसी भी कर्तव्य में ऊंच-नीच, सम्मानित तथा असम्मानित का प्रश्न ही नहीं उठता. अगर कर्तव्य को बिना स्वार्थ के पूरा किया जाए तो करने वाले पर कोई दोष नहीं आता है. उनका कहना था कि कोई भी दो लोग समान नहीं हो सकते. सभी अलग-अलग गुण होते हैं और उन्हीं गुणों के हिसाब से अलग-अलग काम आवंटित किए गए हैं.

दीनदयाल उपाध्याय धर्मनिरपेक्षता के विचार को नापसंद करते थे इस विचार से घृणा करते थे. अलीगढ़ में उन्होंने कहा था कि भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करने से भारत की आत्मा पर हमला किया गया है, अगर हम एकता चाहते हैं तो हमें भारतीय राष्ट्रवाद को समझना होगा जो हिंदू राष्ट्रवाद है और भारतीय संस्कृति हिंदू संस्कृति है.

दीनदयाल उपाध्याय का कहना था कि भारत का मौजूदा संविधान भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ है.

उनका कहना था कि देश में संघीय व्यवस्था नहीं होनी चाहिए अर्थात देश में एक शासन होना चाहिए, देश के अंदर अलग अलग राज्य नहीं होने चाहिए. उनके अनुसार मौजूदा समय में बिहार माता, पंजाब माता, कन्नड़ माता, तमिल माता अर्थात उन्होंने कहा था कि देश के में मौजूदा समस्य में अलग-अलग माताएं हैं और सभी से मिलकर एक माता बनी हुई है, जो कि गलत है. हम सिर्फ एक माता को मानते हैं भारत माता.

कुल मिलाकर जिस तरीके से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा द्वारा दीनदयाल उपाध्याय का महिमामंडन किया जा रहा है,उसी तरीके से दीनदयाल उपाध्याय के विचार इस देश के लिए इस, देश के संविधान के प्रति, इस देश की जनता के प्रति, इस देश में रह रहे अलग-अलग जाति धर्म के लोगों के प्रति क्या थे? वह बताने की जरूरत है.

यह भी पढ़े : क्रांतिकारियों के नाम पर कांग्रेस को कोसने वाले आरएसएस से क्यों नहीं पूछते क्रांतिकारियों के लिए क्या किया?

राष्ट्र के विचार
The post हिन्दू मुस्लिम एकता का विरोध करने वाले, दीनदयाल उपाध्याय जिसे मोदी जी भारतीयो का आइकॉन मानते है, आइये जानते है उनके बारे में appeared first on Thought of Nation.

Advertisement




Advertisement




- Advertisement -
- Advertisement -

Stay Connected

16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe

Must Read

आईसीएआर परीक्षा में भी किया था फर्जीवाड़ा, देश भर में हैं गिरोह की जड़े

- सीकर. नीट परीक्षा में फजी बैठाने वाले गिरोह ने इंडियन कांउसिंल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) परीक्षा में भी फर्जीवाड़ा किया था। सीकर...
- Advertisement -

वैक्सीन की 3 लाख 10 हजार डोज मिली, कल 500 से ज्यादा केंद्रों पर टीकाकरण

सीकर. कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत राजस्थान के सीकर जिले में शुक्रवार को टीकाकरण का फिर नया रेकॉर्ड बन सकता है। टीकाकरण के...

यूपी चुनाव में अखिलेश यादव कहां नजर आ रहे हैं?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुद्दे जनता से दूर होते जा रहे हैं – क्योंकि बहस राजनीतिक एजेंडे के इर्द-गिर्द सिमटती सी नजर आ...

VIDEO: जनता के हितों की बजाय कुर्सी के लिए लड़ रही भाजपा- कांग्रेस: अमराराम

सीकर. केंद्र सरकार के कृषि व श्रम कानूनों तथा पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस व बिजली के दामों सहित बढ़ती महंगाई के खिलाफ माकपा...

Related News

आईसीएआर परीक्षा में भी किया था फर्जीवाड़ा, देश भर में हैं गिरोह की जड़े

- सीकर. नीट परीक्षा में फजी बैठाने वाले गिरोह ने इंडियन कांउसिंल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) परीक्षा में भी फर्जीवाड़ा किया था। सीकर...

वैक्सीन की 3 लाख 10 हजार डोज मिली, कल 500 से ज्यादा केंद्रों पर टीकाकरण

सीकर. कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत राजस्थान के सीकर जिले में शुक्रवार को टीकाकरण का फिर नया रेकॉर्ड बन सकता है। टीकाकरण के...

यूपी चुनाव में अखिलेश यादव कहां नजर आ रहे हैं?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुद्दे जनता से दूर होते जा रहे हैं – क्योंकि बहस राजनीतिक एजेंडे के इर्द-गिर्द सिमटती सी नजर आ...

VIDEO: जनता के हितों की बजाय कुर्सी के लिए लड़ रही भाजपा- कांग्रेस: अमराराम

सीकर. केंद्र सरकार के कृषि व श्रम कानूनों तथा पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस व बिजली के दामों सहित बढ़ती महंगाई के खिलाफ माकपा...

मोदी शाह का नया गुजरात मॉडल

गांधीनगर के राजभवन में कैबिनेट के शपथ ग्रहण में 24 मंत्रियों ने शपथ ली. राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 10 कैबिनेट मंत्रियों और 14 राज्य...
- Advertisement -