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माताओं की कोख को लज्जित कर रहे हैं भाजपा के नेता

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भाजपा की सरकारें लगातार महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध को दबाने की कोशिश कर रही हैं. पिछले कुछ सालों में लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं जो हाई प्रोफाइल भाजपा नेताओं से जुड़े होने के कारण अपने अंजाम तक पहुंचने से पहले ही ,सत्ता के दबाव में दम तोड़ते हुए नजर आए हैं.

भाजपा सरकार जब से सत्ता में आई है, तब से महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती आई है भाजपा का एक स्लोगन भी हुआ करता था बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ.

ऐसा लग रहा है कि भाजपा सरकार आने के बाद यह नारा हिंदुस्तान की बेटियों के लिए वज्र बनकर टूटा है.भाजपा के नेता लगातार महिलाओं के साथ अभद्रता कर रहे हैं, भाजपा के नेताओं पर लगातार महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ शोषण और बलात्कार जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं, लेकिन जितने भी हाई प्रोफाइल मामले सामने आए हैं,उनको सत्ता के दबाव में या फिर उन नेताओं के दबाव में रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की गई है.

अभी ताजा मामला चिन्मयानंद का सुर्खियों में चल रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि, चिन्मयानंद के तमाम वीडियो जारी होने के बाद भी,लड़की द्वारा तमाम आरोप लगाए जाने के बाद भी,अभी तक चिन्मयानंद पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.चिन्मयानंद पर कानून की तरफ से जो शिकंजे अभी तक कसे जाने चाहिए थे,वह अभी तक नजर नहीं आ रहे हैं. चिन्मयानंद के मामले में कानून का जो रवैया देखने को मिल रहा है उससे साफ पता चल रहा है कि चिन्मयानंद जैसे नेताओं के सामने सत्ता किस तरीके से नतमस्तक है,कानून किस तरीके से नतमस्तक है.

हिंदुस्तान की जनता के अंदर भी एक रिवाज सा बन गया है.जाति और धर्म देखकर कुछ लोग बलात्कारियों का, महिलाओं का शोषण करने वालों का, समर्थन और विरोध करने लगे हैं.ऐसे आपराधिक कृत्य की समाज में कोई जगह नहीं है और ऐसे अपराधियों की इस समाज में कोई जगह नहीं है, लेकिन लगातार पिछले कुछ समय से जनता के साथ-साथ मेंस्ट्रीम मीडिया का रवैया भी सवालों के घेरे में है. मामला अगर भाजपा के नेताओं से जुड़ा हुआ नजर आता है तो मीडिया उस खबर से किनारा करती हुई नजर आती है.

पिछले कुछ समय से जिस तरीके से बलात्कार और शोषण के मामलों में भाजपा नेताओं के नाम सामने आए हैं, उसको लेकर मीडिया को जिस तरीके से भाजपा के नेताओं को भाजपा की सरकार को कटघरे में खड़ा करना चाहिए था, सवाल पूछने चाहिए थे या फिर दूसरे मामलों में जिस तरीके से मीडिया डिबेट कराती है उसी तरीके से इन मामलों में भी डिबेट करनी चाहिए थी वह मीडिया की तरफ से देखने को नहीं मिला है.

चिन्मयानंद के मामले में जिस तरीके से पीड़िता ने आरोप लगाए हैं और कहा है कि लगातार 1 साल से ब्लैकमेल करके चिन्मयानंद उस पीड़िता के साथ दुष्कर्म कर रहा था और धमकियां दे रहा था, पीड़िता को कानून के साथ-साथ सरकार का और मीडिया का पूरा सहयोग होना चाहिए था लेकिन यह सहयोग देखने को नहीं मिला है.

ठीक ऐसा ही देखने को मिला था भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में.

उन्नाव की एक महिला ने भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था, मामला काफी पुराना था, लेकिन यह मामला भी सुर्खियों में तब आया जब पीड़िता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की थी. उसके बाद यह मामला सुर्खियों में आया और मीडिया इस खबर को दिखाने के लिए मजबूर हुई. कानून ने भी शुरुआत में मामले को अपनी तरफ से रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की. उसमें भी कुलदीप सिंह सेंगर के रसूख का दबाव साफ नजर आ रहा था. सत्ता पूरी तरीके से लाचार नजर आ रही थी, शुरुआती कुछ महीनों तक सत्ता की तरफ से और कानून की तरफ से कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया. उन्नाव पीड़िता के पिता की मौत पुलिस कस्टडी में हो गई. जनता और विपक्ष के दबाव में कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी हुई, सुप्रीम कोर्ट को भी बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा, तब जाकर सुन कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी हुई थी. अभी भी मामला चल रहा है. उन्नाव की पीड़िता ने अपने पूरे परिवार को खो दिया है.

अभी हाल ही में उन्नाव पीड़िता का एक्सीडेंट हुआ था उन्नाव पीड़िता की गाड़ी को ट्रक द्वारा टक्कर मार दी गई थी. उसमें भी आरोप लगाए गए थे कि यह कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर हुआ है. बहरहाल उन्नाव पीड़िता ने अपना पूरा परिवार खो दिया है मामला अभी भी अदालत में है.उम्मीद है कानून पूरी ईमानदारी के साथ उन्नाव पीड़िता को न्याय देगा.

पिछले कुछ मामलों को देखते हुए यह बार-बार सवाल मन में उठ खड़े होते हैं कि आखिर भाजपा खुद की पार्टी के अपराधी, बलात्कारी नेताओं पर, विधायकों पर, सांसदों पर इतनी मेहरबान क्यों है? या फिर इतनी लाचार क्यों है इन नेताओं विधायकों और सांसदों से? महिला सुरक्षा को लेकर और महिलाओं को लेकर तमाम बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा अपने ही पार्टी के नेताओं के सामने इतनी लाचार क्यों है? कानून तो अपना काम बाद में करेगा भाजपा इन्हें अपनी ही पार्टी से निकाल क्यों नहीं पा रही है? कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में भी यही देखने को मिला कि लगभग 3 साल बाद जनता और विपक्ष के दबाव में भाजपा ने कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निकाला. आरोप लगने के बाद 3 साल तक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी का सदस्य और विधायक बना के रखा था भाजपा ने.

जनता को गुमराह करने वाले नारों के सहारे भाजपा कब तक इस देश की महिलाओं का मजाक बनाती रहेगी? इस देश की मीडिया क्या सिर्फ विपक्ष को बदनाम करने के लिए है? विपक्ष को सवाल करने के लिए है ? भाजपा के नेताओं या फिर भाजपा पार्टी से सवाल करने की जिम्मेदारी मीडिया की नहीं है? मीडिया भी भाजपा के सामने पूरी तरीके से नतमस्तक नजर आ रही है. पूरे देश का दबाव किसी मामले पर होता है तब मीडिया उस खबर को दिखाने के लिए मजबूर होती है. नहीं तो सत्ता के दबाव में मीडिया भी खबर से किनारा कर लेती है.

चिन्मयानंद जैसे लोग इस समाज पर एक कलंक की तरह है,जो लगातार अपराधिक कृत्य को अंजाम देते रहते हैं और अपने अपराध को छुपाने के लिए भाजपा जैसी पार्टी का सहारा लेकर अपने रसूख का इस्तेमाल करके अपराधिक घटनाओं पर सजा से बचने की कोशिश करते रहते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी देश के लिए, इस देश की महिलाओं के लिए अपने भाषणों में बड़ी-बड़ी बातें करते रहते हैं लेकिन भाजपा के नेताओं द्वारा की जा रही इन आपराधिक घटनाओं पर प्रधानमंत्री मोदी चुप्पी साध लेते हैं. क्या प्रधानमंत्री मोदी को यह दोहरा रवैया शोभा देता है?

प्रधानमंत्री मोदी को और भाजपा के नेताओं को खुद चाहिए कि ऐसे मामले सामने आने के बाद तुरंत पार्टी के स्तर पर ऐसे नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करें. उनको पार्टी से निष्कासित करें और पीड़ितों को न्याय दिलवाने में पार्टी की तरफ से पूरा सहयोग करें. इससे भाजपा की छवि और प्रधानमंत्री मोदी की छवि जनता के सामने सही रहेगी.

यह भी पढ़े : सच का दम घोंटती मीडिया

राष्ट्र के विचार
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