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Home News नतीजों के बाद सरकार किसी की भी बने. जनता ने जहरीले राष्ट्रवाद...

नतीजों के बाद सरकार किसी की भी बने. जनता ने जहरीले राष्ट्रवाद को नकारना शुरू कर दिया है

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पुलवामा के शहीदों की लाशों पर सवार होकर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की थी 2019 के लोकसभा चुनाव में. जिसके जरिए एनडीए गठबंधन केंद्र की सत्ता में भाजपा के नेतृत्व में वापस आया था.

लगभग 5 महीने के अंदर जनता ने भाजपा के हौसलों को जमीन पर पटक के रख दिया है. महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावी नतीजों के बाद सरकार किसी की भी बने जनता ने जहरीले राष्ट्रवाद को नकारना शुरू कर दिया है .

यह जरूर है कि दोनों ही राज्यों में यानी महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा और भाजपा के साथ गठबंधन की पार्टियां, सीटों के आंकड़ों के हिसाब से आगे हैं, लेकिन बात अगर विचारधारा कि , की जाए, मोदी लहर कि की जाए, मीडिया मैनेजमेंट के सहारे प्रधानमंत्री मोदी के करिश्मे कि, की जाए तो भाजपा के तमाम दिग्गजों को प्रधानमंत्री मोदी के साथ यह स्वीकार करना होगा की जनता के जरूरी मुद्दों को दबाकर, गैर जरूरी मुद्दों को उछाल कर देश को ज्यादा दिन तक गुमराह नहीं किया जा सकता.

महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा और भाजपा से जुड़े हुए दल जरूर सरकार बनाने जा रहे हैं या फिर सरकार बनाने के करीब है या फिर कह सकते हैं कि पहले हकदार हैं, लेकिन बात अगर विचारधारा की है, तो एक तरफ छद्म राष्ट्रवाद के सहारे जनता की मूलभूत जरूरतों से जनता का ही ध्यान हटाकर चुनाव जीतने की लगातार कोशिश थी और दूसरी तरफ जो पार्टियां थी उनमें से कुछ को छोड़कर लगातार जनता के जरूरी मुद्दों पर बात करते हुए, खुद की पार्टी के लिए चुनाव प्रचार कर रही थी और जनता के जरूरी मुद्दों को अपनी बातों में जगह देने की कोशिश कर रही थी.

बात अगर भाजपा के नेताओं कि की जाए और खुद प्रधानमंत्री मोदी कि,की जाए तो पूरी भाजपा ने और प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा और महाराष्ट्र में धुआंधार चुनाव प्रचार किया. भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी का दोनों ही राज्यों में हाईटेक चुनाव प्रचार हुआ, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ भाजपा के तमाम नेता महिला सुरक्षा, युवाओं के रोजगार और देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, जनता की आर्थिक स्थिति में सुधार जैसे मुद्दों से खुद को दूर रखते हुए, धारा 370 पाकिस्तान, आतंकवाद जैसी बातों को खुद के भाषणों में जगह देकर, मीडिया प्रचार के माध्यम से एक तरफा प्रचंड जीत हासिल करने की कोशिश में थे.भाजपा के तमाम सहयोगियों के साथ-साथ भाजपा के नेताओं और प्रधानमंत्री मोदी के अरमानों पर जनता ने तगड़ी चोट की है.

हरियाणा में भाजपा ने 75 पार का नारा दिया था, मीडिया हरियाणा में भाजपा को 85 से ज्यादा सीटें देने की बात कर रही थी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को हरियाणा में सिर्फ 3 सीट दे रही थी और कुछ मीडिया चैनल 5 और 7

भाजपा के तमाम नेताओं के साथ-साथ मीडिया को भी भरोसा था कि, जिस तरीके से मीडिया ने भाजपा की प्रचार एजेंसी बनकर मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुसलमान, पाकिस्तान, कश्मीर जैसे मुद्दों के सहारे जनता के मुद्दों को दबाया है, उससे भाजपा आसानी से प्रचंड जीत हासिल कर लेगी और पूरे विपक्ष के साथ-साथ कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जाएगा.

लेकिन बात अगर हरियाणा की करे तो कांग्रेस ने जबरदस्त उलटफेर किया है. भाजपा के हाईटेक चुनाव प्रचार और उग्र राष्ट्रवाद के सामने कांग्रेस का सामान्य चुनाव प्रचार भी, भाजपा को जबरदस्त टक्कर देता हुआ नजर आया है. बात अगर हरियाणा की ही करे तो कांग्रेस हरियाणा के अंदर चुनाव से पहले कई गुटों में बटी हुई नजर आ रही थी, कई नेता पार्टी के अंदर खुलकर बगावत कर रहे ,थे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को ब्लैकमेल करते हुए नजर आ रहे थे,लेकिन पार्टी ने बहुत ही कम समय में भाजपा के अरमानों की धज्जियां उड़ा के रख दिया है.

बात अगर महाराष्ट्र की की जाए तो महाराष्ट्र की भाजपा सरकार के कई मंत्री चुनाव हार चुके हैं.पंकजा मुंडे भी बुरी तरीके से चुनाव हारी हैं, महाराष्ट्र चुनाव में भी मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुसलमान, पाकिस्तान-आतंकवाद, धारा 370 जैसे मुद्दों के सहारे भाजपा द्वारा हाईटेक चुनाव प्रचार किया गया. भाजपा द्वारा यह प्रचारित किया गया कि, भाजपा के सामने कांग्रेस एनसीपी गठबंधन कहीं नहीं दिख रहा है

महाराष्ट्र के अंदर कांग्रेस एनसीपी गठबंधन की सच्चाई यह भी है कि, चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और एनसीपी के कई बड़े नेता पार्टी छोड़कर भाजपा और शिवसेना ज्वाइन कर चुके थे. उसके बावजूद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इस उम्र में भी हौसला नहीं हारा और बड़े-बड़े युवाओं के लिए मिसाल कायम की. शरद पवार ने कांग्रेस एनसीपी गठबंधन के लिए धुआंधार चुनाव प्रचार किया. जिसका नतीजा यह हुआ कि मुंबई और महाराष्ट्र का किंग अपने आपको कहने वाली शिवसेना महज कुछ सीटों से एनसीपी को मिलती हुई सीटों से ज्यादा है.

महाराष्ट्र के अंदर भी कांग्रेस में भारी उथल-पुथल चुनाव से ठीक पहले मची हुई थी. कई नेता पार्टी छोड़ कर जा चुके थे, कई नेता खुलकर गुटबाजी कर रहे थे, कई नेताओं ने अपनी पार्टी पर कई तरह के आरोप लगाकर खुद को चुनाव प्रचार से दूर कर लिया था. उसके बावजूद भी कांग्रेस ने महाराष्ट्र में अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराई है इस विधानसभा चुनाव में.

पूरे चुनाव प्रचार और आते हुए दिखाई दे रहे हैं नतीजों पर गौर किया जाए, कोई भी पार्टी दोनों ही राज्यों में सरकार बनाएं, लेकिन भाजपा की प्रचार एजेंसी मीडिया द्वारा जो प्रचारित किया जा रहा था कि विपक्ष इस देश से खत्म हो रहा है, भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जो प्रचारित किया जा रहा था कि,विपक्ष कहीं दिखाई नहीं दे रहा है यह सब बातें पूरी तरीके से खोखली साबित हुई है.

महाराष्ट्र में अगर कांग्रेस ने एकजुटता दिखाई होती, सभी कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश स्तर के नेताओं ने चुनाव प्रचार में अपना सब कुछ झोंक, जी जान लगाया होता तो, मीडिया के साथ-साथ भाजपा को भाजपा के नेताओं के अरमानों को आज जनता जमीन पर पटक देती.

जनता पूरी तरीके से विपक्ष के साथ थी, कांग्रेस के साथ थी, लेकिन विपक्ष के साथ-साथ कांग्रेस के नेता चुनाव के दौरान और चुनाव से पहले से जनता से कनेक्ट नहीं हो पाए.

ऐसा लग रहा है दोनों ही राज्यों के दिखाई दे रहे चुनाव परिणामों के बाद, जनता को और विपक्ष को निराश होने की जरूरत नहीं ह. जनता ने संदेश दे दिया है, गुमराह करने वाली राजनीतिक और उग्र राष्ट्रवाद के सहारे देश को लंबे समय तक जमीनी हकीकत से दूर नहीं रखा जा सकता.

यह भी पढ़े : चुनाव जीतने के लिए, जनता के मुद्दे दबाने के लिए 1857 के इतिहास के साथ छेड़छाड़ क्यों अमित शाह जी?

Thought of Nation राष्ट्र के विचार
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