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बोर्ड परीक्षाओं के टॉपर भी दिव्यांगों को पढ़ाने के इच्छुक, 179 ने किया आवेदन

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सीकर. देशभर में विशेष शिक्षा पाठ्यक्रमों के प्रति विद्यार्थियों में पहली बार खासा उत्साह देखने को मिला है। बोर्ड परीक्षाओं के टॉपर 179 विद्यार्थी भी विशेष शिक्षा के डिप्लोमा (Special education) पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाना चाहते हैं। भारतीय पुनर्वास परिषद के इतिहास में पहली बार इतनी संख्या में मेरिट होल्डर विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है। भारतीय पुनर्वास परिषद ने कक्षा बारहवीं में 90 से 100 फीसदी अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों का प्रवेश दस्तावेज सत्यापन की वजह से रोक दिया था। परिषद की जांच में 179 विद्यार्थियों के दस्तावेज सही मिले है। इस पर परिषद ने देश के सभी विशेष महाविद्यालयों को ऐसे विद्यार्थियों को अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश देने के निर्देश दिए है। पहले राउंड की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिषद के बाद दूसरी सूची जारी की जाएगी। परिषद की दूसरी सूची का विद्यार्थियों को काफी इंतजार है। क्योंकि पहली सूची में कट ऑफ काफी उपर जाने की वजह से प्रवेश का सपना पूरा नहीं हो सका है।जेईई में प्रवेश वालों ने भी किए आवेदनराजस्थान के 90 से अधिक ऐसे विद्यार्थियों ने भी आवेदन किया है जिनकी पहली पसंद इंजीनियरिंग है। ऐसे विद्यार्थियों को पहली सूची में कॉलेज भी मिल गया है, लेकिन उन्होंने प्रवेश में रूचि नहीं दिखाई है। ऐसे में इनकी रिक्त सीटों पर दूसरे विद्यार्थियों को प्रवेश मिलना तय है।राजस्थान के सबसे ज्यादा 80 से अधिक विद्यार्थी90 फीसदी से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के विशेष शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों में सबसे ज्यादा राजस्थान के 80 विद्यार्थी है। इन विद्यार्थियों के ऑनलाइन फार्म व भरे हुए अंकों का रंगीन अंकतालिका के आधार पर सत्यापन हुआ है।किसी ने सेवा तो किसी ने जल्दी नौकरी की वजह से किया आवेदनपरिषद की ओर से इन विद्यार्थियों को जो कॉलेज आवंटित किए गए है उनकी ओर से कई टॉपर विद्यार्थियों से सम्पर्क किया गया। बातचीत में कई विद्यार्थियों ने दिव्यांग विद्यार्थियों की सेवा के लिए इस फील्ड में कॅरियर बनाने की बात कही तो किसी ने इन पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के बाद जल्दी नौकरी लगने का तर्क देते हुए प्रवेश लेने की बात कही।बेरोजगारी ने बढ़ा दिया रूझानदेश के ज्यादातर विशेष शिक्षा महाविद्यालयों में तीन साल पहले तक प्रवेश के लिए विद्यार्थी नहीं मिल रहे थे। लेकिन देश के सभी राज्यों में लगातार निकल रही भर्ती सहित अन्य कारणों से अब रूझान तेजी से बढ़ रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि बेरोजगारी की वजह से सभी पाठ्यक्रमों के प्रति युवाओं में उत्साह बढ़ा है।

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