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सहकारी बैंकाें में फर्जी डिग्रियाें से लिए प्रमाेशन, छोटे से बड़े सभी स्तर तक के अफसर आरोपी

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आजकलराजस्थान / जयपुर।

प्रदेश के सहकारी बैंकों में फर्जी डिग्रियों से प्रमोशन लेने का बड़ा घोटाला सामने आया है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने सामूहिक रूप से एमएससी आईटी, एमटेक और एमसीए की डिग्रियां खरीदीं और दो-दो प्रमोशन ले लिए। आराेपियाें में ऑफिस के चपरासी से लेकर डीजीएम लेवल तक के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच में सामने आया कि जाे डिग्रियां लगाई गई हैं, उनकी परीक्षाओं के दिन आराेपी कर्मचारी और अधिकारी अपने दफ्तराें पर ड्‌यूटी पर थे।सीकर में इस तरह की शिकायत मिलने के बाद सहकारिता रजिस्ट्रार ने जांच कराई ताे मामले का खुलासा हुआ। इन लोगों को जब रजिस्ट्रार ने तलब किया ताे उन्हाेंने खुलासा किया कि इस तरह का घपला करने वाले वे अकेले 6 कर्मचारी नहीं हैं, ऐसा तो पूरे प्रदेश में हुआ है।

इसके बाद रजिस्ट्रार ने प्रदेश के सभी सहकारी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि फर्जी डिग्री से प्रमोशन के मामलों की जांच कर रिकवरी की जाए। सीकर के आराेपी छह कर्मचारियाें से प्रमाेशन लेकर प्राप्त किए गए अतिरिक्त वेतन की रिकवरी करने के आदेश भी दिए गए हैं।

किसलिए दिए गए थे प्रमाेशन

सहकारी बैंकों में 14वें वेतन समझौते में यह प्रावधान किया गया था कि यदि कोई कर्मचारी एमएससी आईटी, एमटेक या एमसीए की डिग्री लेता है तो उसे एक साथ दो प्रमोशनों का लाभ दिया जाएगा। यह आदेश इसलिए जारी किए गए थे ताकि सहकारी बैंकों में कम्प्यूटरीकरण को बढ़ावा मिल सके। इस आदेश के बाद सहकारी बैंकों में डिग्रियों की बाढ़ आ गई।

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी के एजेंटों के जरिए ऑफिस रहते हुए कर्मचारियों ने एमएससी आईटी, एमटेक और एमसीए की रेग्यूलर डिग्रियां ले ली।

लाेन घाेटाले की चल रही जांच

हाल में सहकारी बैंकाें में लाेन घाेटाला भी सामने आया था, जिसकी जांच चल रही है। इसमें बैंक के अफसरों ने दलालों के साथ मिलकर फर्जी आईटीआर तैयार की और फर्जी दस्तावजों से करोड़ों रुपए के लोन उठा लिए। भौतिक सत्यापन में न तो वहां मकान मिला और न ही लोन लेने वालों के नाम-पते सही मिले।

प्रदेशभर में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जांच जारी : रजिस्ट्रार”फर्जी डिग्रियों के जितने भी मामले सामने आ रहे हैं उनमें रिकवरी के आदेश दिए गए हैं। प्रदेश भर में बैंकों में इस तरह के मामले जानकारी में आ रहे हैं। अभी जांच जारी है।” -नीरज के. पवन, रजिस्ट्रार

संख्या का पता जांच के बाद लगेगा : एमडी अपेक्स बैंक”अपेक्स बैंक में भी फर्जी डिग्रियों के मामले सामने आए हैं। अभी जांच जारी है, इसलिए आरोपी कर्मचारी व अफसरों की संख्या नहीं बता सकते। जांच के बाद इस आंकड़े का पता लगेगा।” -इंद्र सिंह, एमडी, अपेक्स बैंक

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