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सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल : केवी व मॉडल स्कूल की तरह होंगे

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आजकल राजस्थान/ जयपुर

   राजस्थान में इसी सत्र में  शिक्षा विभाग अंग्रेजी माध्यम सरकारी स्कूल शुरू करने जा रहा है। शहरी क्षेत्र में शुरू होने के कारण लोगों में भी इस स्कूल को लेकर उत्साह है। स्कूल का चयन किए जाने के बाद अभिभावकों ने कयास लगाने भी शुरू कर दिए हैं कि अगर ये स्कूल भी केंद्रीय विद्यालयों या मॉडल स्कूलों की तरह चलाए गए तो बड़े निजी स्कूलों के समानांतर सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल भी खड़े हो जाएंगे। ताकि परिजनों को अंग्रेजी माध्यम के नाम पर निजी स्कूलों में मोटी फीस भरने से भी छुटकारा मिल पाएगा।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से ही होगी मान्यता, बच्चों का भी होगा नामांकन
शहर के मानसरोवर इलाके में राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में शुरू किया जाने वाले महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से ही मान्यता प्राप्त रहेगा। स्कूल में वर्तमान में करीब दो सौ लड़कियां हैं। इनमें से जिनके माता-पिता चाहेंगे, वे यहीं पढ़ेगी, अन्यथा उन्हें नजदीक के स्कूल में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
कार्यरत 134 मॉडल स्कूल, प्रवेश के लिए लगती है लाइन
प्रदेश में शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े ब्लॉक्स में 186 विवेकानंद मॉडल स्कूलों की योजना लागू की गई थी। साल 2014-15 में प्रथम चरण में 71 मॉडल स्कूल शुरू किए गए। उसके बाद साल 2016-17 में दूसरे चरण में 63 स्कूल और शुरू किए गए। वर्तमान में कुल 134 विवेकानंद मॉडल स्कूल प्रदेश में चल रहे हैं।
अंग्रेजी माध्यम के ये स्कूल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं। अब स्थिति यह है कि इन स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदनों की लम्बी कतारें लग रही हैं। इतना ही नहीं पिछले सत्र में तो कई विधायकों व अधिकारियों के बच्चे भी मॉडल स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे।
केंद्रीय विद्यालयों मेे सिफारिश से भी नहीं मिल पाता प्रवेश
इसी प्रकार केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे केंद्रीय विद्यालयों में भी शिक्षण के बेहतर स्तर के कारण प्रवेश के लिए लम्बी-लम्बी कतारें लग रही हैं। केंद्रीय विद्यालयों में सांसद का कोटा होने के कारण एडमिशन के समय सैकड़ों की संख्या में लोग अपनी सिफारिशें लेकर सांसद के घर पहुंच रहे हैं। देशभर में 25 रीजन में 1204 केंद्रीय विद्यालयों लाखों बच्चे पढ़ रहे हैं। अकेले जयपुर के शहरी क्षेत्र में ही सात केंद्रीय विद्यालय हैं।
इधर, सामानांतर सरकारी स्कूल में अंग्रेजी माध्यम में नाममात्र के बच्चे
वहीं, जयपुर शहर में गांधी सर्किल स्थित पोद्दार स्कूल में 90 के दशक में ही हिंदी माध्यम के सामानांतर अंग्रेजी माध्यम भी शुरू किया गया था। 9वीं से 12वीं कक्षा में बच्चों को हिंदी माध्यम या अंग्रेजी माध्यम का विकल्प दिया जाता है। दो-तीन दशकों बाद भी चार कक्षाओं में कुल मिलाकर सौ से कम बच्चे हैं। 9वीं व 10वीं कक्षा में आंकड़ा दहाई का अंक भी नहीं छू पाता। वहीं, 11वीं व 12वीं में 20-30 तक छात्र हो जाते हैं।
एक्सपर्ट कमेंट
– अंग्रेजी माध्यम स्कूल आज के जमाने की आवश्यकता है। कुछ दशक पहले तक कई सरकारें इसका विरोध करती थी। लेकिन, जिस तरह से अंग्रेजी का चलन बढ़ा, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की जरुरत बढ़ी है। ऐसे में सरकार का यह प्रयास अच्छा है। बशर्ते इसे ठीक प्रकार से लागू किया जाए।
सरकार की ओर से शुरू किए जा रहे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को भी केंद्रीय विद्यालयों की तरह बनाया जा सकता है। लेकिन, स्कूलों का इन्फ्रास्टक्चर बेहतर होना चाहिए। शिक्षक, प्रशिक्षित व पूरी मात्रा में होने चाहिए। तभी अंग्रेजी माध्यम स्कूल सफल हो पाएंगे।

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