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लोकसभा चुनाव 2019:बीकानेर,गंगानगर और नागौर लोकसभा सीट पर कौन कितना भारी

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बीकानेर संभाग की बीकानेर व श्रीगंगानगर लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। भाजपा मोदी के नाम पर और कांग्रेस मोदी राज के भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट मांग रही है। श्रीगंगानगर में दोनों प्रत्याशियों के लिए भितरघात से निपटना बड़ी चुनौती है। नागौर में भाजपा हनुमान बेनीवाल के कंधे पर सवार होकर मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने ज्योति मिर्धा को उतारा है। यहां भी कड़ा संघर्ष है। तीनों सीटों पर 6 मई को मतदान होगा।जमीनी हकीकत :यहां पिछले दो चुनाव भाजपा ने जीते। 2014 में मोदी लहर का असर था तो इस बार भी शहरी और तहसील हेड क्वार्टर में मोदी फैक्टर दिख रहा है। केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल साधनों में आगे हैं। उन्हें पूर्व भाजपा नेता देवीसिंह भाटी नुकसान पहुंचा रहे हैं तो कांग्रेस के मदन गोपाल मेघवाल को अपने नेताओं को साधने में मुश्किल हो रही है। भाजपा राष्ट्रवाद पर और कांग्रेस विकास के नाम पर वोट मांग रही है।

किसका पलड़ा भारीः बीकानेर पूर्व, बीकानेर पश्चिम, अनूपगढ़ में भाजपा आगे रह सकती है तो कोलायत और लूणकरणसर कांग्रेस के लिए स्थितियां बेहतर नजर आ रही हैं। नोखा, खाजूवाला और श्रीडूंगरगढ़ में कड़ा मुकाबला है। जो बीकानेर स्थापना दिवस और अबूझ सावे के मध्य वोट डलवा देगा, वो फायदे में रहेगा।

जीत का फाॅर्मूला:भाजपा नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के नाम पर वोट मांग रही है और साथ में यह भी कह रही है कि अर्जुनराम जीतकर मंत्री बन सकते हैं। ये बातें लोगों के गले उतरीं तो असर देखने को मिल सकता है। राष्ट्रवाद, सुरक्षा आदि मुद्दों को भाजपा जमकर भुना रही है। कांग्रेस विकास और मोदी राज के भ्रष्टाचार के विरुद्ध वोट मांग रही है। इसके अलावा कांग्रेस बीकानेर से दो बार के सांसद अर्जुनराम मेघवाल की एंटी इनकंबेंसी पर भी वोट की अपील कर रही है।जमीनी हकीकत: चार माह पहले विधानसभा चुनाव हुए, तब भाजपा यहां सत्ता विरोधी लहर के बावजूद चार सीटें जीती थीं लेकिन अब मोदी लहर के बावजूद भाजपा के लिए जीत उतनी ही मुश्किल हो रही है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव में बागी हुए चार नेताओं का साथ मिलने से काफी उत्साहित है। भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। कहीं कोई मुद्दा नहीं उठ रहा।

किसका पलड़ा भारी:सूरतगढ़, श्रीकरणपुर, सादुलशहर और पीलीबंगा में भाजपा प्रत्याशी निहालचंद मजबूत दिख रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी भरतराम मेघवाल हनुमानगढ़, संगरिया, श्रीगंगानगर और रायसिंहनगर में आगे हैं। मगर दोनों प्रत्याशियों का अपने ही गृह क्षेत्रों में विरोध हो रहा है। रायसिंहनगर में विरोध करने वालों में भाजपा की एक लॉबी भी शामिल है। इन्होंने निहाल के खिलाफ अभियान भी चला रखा है। दूसरी ओर, कांग्रेस प्रत्याशी भरतराम मेघवाल को अपने ही गृह क्षेत्र पीलीबंगा में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। यहां विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी विनोद गोठवाल की हार की वजह से भी भितरघात की आशंका जताई जा रही है।

जीत का फाॅर्मूला:परंपरागत वोटर्स कांग्रेस के साथ हैं, वहीं युवा मोदी लहर के साथ दिख रहे हैं। यहां सबसे बड़ा वोटर किसान वर्ग है, जो अभी खामोश है। जिसने किसानों को पक्ष में कर लिया, जीत उसी की होगी। दोनों को भितरघात रोकने के लिए बागियों को मनाना होगा।

जमीनी हकीकत:यह सीट जातिगत समीकरणों में फंसी है। किसी एक दल के पक्ष में लहर जैसी नहीं दिख रही। यहां वही जीतेगा जो जाट और राजपूत वोटों को साधने में कामयाब हो जाएगा। नए 2.5 लाख वोटर भी निर्णा यक भूमि का निभा सकते हैं। शहरी वोटर चुप हैं। जीत का अंतर भी बड़ा नहीं रहने वाला। मुकाबला कांटे का है। ज्योति के लिए पिछली हार से सहानुभूति है तो बेनीवाल की इलाके में खुद की पैठ है।

किसका पलड़ा भारीः खींवसर, जायल व नावां में बेनीवाल मजबूत हैं। यहां के गांवों में बेनीवाल और मोदी का क्रेज है। वहीं, डीडवाना, परबतसर और मकराना में ज्योति मिर्धा आगे दिख रही है। मकराना में मुस्लिम वोटर एकतरफा जा सकते हैं। नागौर और लाडनूं में कड़ी टक्कर है। लाडनूं सिटी में बेनीवाल को लीड मिल सकती है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस मजबूत है।

जीत का फाॅर्मूला: बेनीवाल को मोदी के राष्ट्रवाद, भाजपा-आरएलपी के वोटरों के अलावा राजपूत वोटरों से भी बहुत उम्मी द है। राजपूत वोटों को साधने के लिए भाजपा ने यहां राजपूत समाज के बड़े नेताओं को लगा भी रखा है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र पर भी फोकस ज्या दा है। उधर, ज्योति मिर्धा को कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक पर भरोसा है। राज्य में अपनी पार्टी की सरकार से भी माहौल को पक्ष में लाने की कोशि श है। जाट वोटों के अलावा नोन जाट वोटों पर भी बराबर नजर बनाए हुए हैं।

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