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राजस्थान में मानसून हो सकता है लेट, जुलाई के दूसरे सप्ताह तक दे सकता है दस्तक।

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आजकल राजस्थान न्यूज़ / जयपुर।

वायु चक्रवात और अलनीनो ने मानसून की रफ्तार पर लगाम लगा दी है। देरी से चल रहा मानसून और लेट हो रहा है। 10 जून तक कर्नाटक, तेलंगाना पहुंचने वाला मानसून  राजस्थान में इसके और 7 दिन देरी से आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। दिल्ली और जयपुर में लगभग एक समय में ही मानसून आता है, ऐसे में इसके जुलाई के दूसरे सप्ताह तक आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
प्रशांत महासागर  में तीन से पांच साल के बीच अलनीनो की स्थितियां बनती हैं। इस साल मार्च में प्रशांत महासागर में अलनीनो का प्रभाव सामने आया लेकिन इस बार अलनीनो सामान्य से अधिक है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अलनीनो कमजोर हो रहा है, और जून तक इसका प्रभाव खत्म होगा। यही कारण है कि इस बार मानसून प्रभावित रहा।

जानिये क्या है अलनीनो?
प्रशांत महासागर की सतह का तापमान अचानक बढ़ जाता है, जिससे हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर बहने लगती हैं। महासागर की सतह से 20-25 किलोमीटर ऊपर तक वायु के बदलाव का क्षेत्र बन जाता है, जो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं की रफ्तार रोक देता है। ऐसे में मानसून या तो कमजोर हो जाता है या बारिश बहुत कम होती है।

राजस्थान में 22 जून तक मानसून की बांसवाड़ा, उदयपुर में दस्तक हो जाती है। 2016 में 22 जून को मानसून आ गया था। साथ ही दिल्ली और जयपुर में मानसून आने का समय एक ही होता है। यहां 28 और 29 जून तक मानसून आ जाता है।
मौसम विशेषज्ञ इस बार दिल्ली में ही जुलाई के दूसरे सप्ताह में मानसून आने का समय बता रहे हैं। ऐसे में जयपुर को भी अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि प्रदेश में इस बार एक जून से 20 जून के बीच ही प्री मानसून  में 59 फीसदी अधिक बारिश हो हुई है। अब मानसून से इससे अधिक उम्मीद की जा रही है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर से अगर कोई सिस्टम डवलप हो तो प्रदेश में मानसून इसी जून के अंत तक आ सकता है। अरब सागर से नम हवाएं मानसून के वेग को आगे बढ़ाएंगी।

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