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राजस्थान: दुष्कर्म पीड़िताओं के केस दर्ज कराने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व साथिन मदद करेंगी

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आजकल राजस्थान / जयपुर।

थानागाजी पति के सामने गैंगरेप के बाद एसपी ऑफिस में FIR दर्ज कराने संबंधी आदेश जारी कर चुकी सरकार अब महिलाओं के हित में एक और नया निर्णय लागू करने जा रही है। अब यदि कोई महिला या बालिका अपने साथ हुए किसी तरह के लैंगिक अपराध के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट कराने से डरती है तो साथिन व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उसकी मदद करेंगी। पीड़िता इन्हें अपराध की जानकारी दे सकेंगी। इन महिला समूहों का पुलिस से सामंजस्य कराया जाएगा। शिकायत मिलने के बाद पुलिस खुद पीड़िता से मिलकर मामला दर्ज करने की कार्रवाई शुरू करेगी। सरकार दुष्कर्म जैसे मामलों में सजा के प्रावधानों को लेकर गांव-गांव में प्रचार भी करेगी, ताकि अपराधियों के मन में भय रहे। गृह विभाग इसका परिपत्र तैयार कर रहा है। 11 जून को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में होने वाली गृह विभाग की समीक्षा बैठक में इस परिपत्र को मंजूरी मिल सकती है।थानागाजी मामले में परिवाद दर्ज करने में पुलिस की निष्क्रियता से सरकार की किरकिरी हुई थी। इसके बाद गृह विभाग को निर्देश दिए गए थे कि ऐसे मामलों में वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जाएं। इसके बाद 1 जून से यह व्यवस्था शुरू की गई थी कि यदि संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो पीड़िता सीधे SP ऑफिस में रिपोर्ट दर्ज करा सकती है।

डीएसपी व एसएचओ काे 16सीसीए की चार्जशीट, पूरा थाना बदलेगा

थानागाजी मामले में जांच रिपाेर्टें मिलने के बाद सरकार ने डीएसपी जगमोहन शर्मा सहित पूरे थाने का तबादला करने और एसएचओ सरदार सिंह के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज करने का निर्णय लिया है। डीएसपी, एसएचओ व कांस्टेबल महेश काे 16 सीसीए की चार्जशीट दी जाएगी। एसआई बाबूलाल, एएसआई रूपनारायण, कांस्टेबल घनश्याम, बृजेंद्र, राजेंद्र व राम रतन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही हाेगी। तत्कालीन एसपी राजीव पचार व एएसपी चिरंजीलाल काे भी स्पष्टीकरण देना होगा।

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