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तीसरी बार चुनाव लड़ रहे देवजी को मोदी नाम तो तीन बार हार चुके देवासी को सहानुभूति का सहारा

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जोधपुर. गुजरात से सटे जालोर-सिरोही संसदीय क्षेत्र का मिजाज हमेशा जुदा रहा। यहां के करीब तीस फीसदी मतदाता अन्य राज्यों में काम करते हैं। यहीं कारण रहाकि यहां से बाहरी प्रत्याशियों ने बड़ी संख्या में जीत हासिल की। वर्तमान में भाजपा ने लगातार दो चुनाव जीत चुके देवजी पटेल को एक बार फिर अवसर प्रदान किया है। वहीं, कांग्रेस ने तीन बार विधानसभा चुनाव हार चुके रतन देवासी को अपना प्रत्याशी बनाया है। दो बार सांसद रहने के कारण एंटी इनकंबेंसी का सामना कर रहे देवजी को मोदी नाम का सहारा मिला हुआ है। जबकि देवासी तीन चुनाव हारने के कारण उनके प्रति लोगों में उपजी सहानुभूति को के दम पर बेड़ा पार करने की फिराक में है।जालोर, सिरोही, रेवदर, सांचौर, पिंडवाड़ा-आबू, आहोर, भीनमान व रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर गठित इस संसदीय क्षेत्र की आठ सीटों में से छह पर भाजपा के और एक-एक पर कांग्रेस व निर्दलीय विधायक है। जालोर व सिरोही जिले के अधिकांश लोग गुजरात, महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में फैले हुए है। मतदान के साथ ही सावों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में लोग वापस अपने गांवों की तरफ लौटन लगे है। कई बार प्रत्याशी भी इन लोगों को बुलाते है। ये प्रवासी लोग यहां के चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करते है।ऐसा है माहौलसंसदीय क्षेत्र में कोई मुद्दा नहीं है।न लोगों की अपेक्षा है और न ही प्रत्याशी किसी तरह के वादे कर रहे हैं। अलबत्ता दो बार सांसद रहने के कारण देवजी पटेल को लेकर शिकायतें अवश्य हैं, लेकिन लोगों में आक्रोश नहीं। इस कारण देवजी प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी रतन देवासी तीन बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। इस कारण उनके प्रति लोगों में सहानुभूति भी है। वे लोगों से एक बार मौका देने का आग्रह कर रहे है। ये है जातीय समीकरण19.53 लाख मतदाताओं वाले जालोर-सिरोही अनुसूचित जाति-जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है। इनकी संख्या सात लाख से अधिक है। वहीं सामान्य वर्ग में कलबी(पटेल) तीन लाख, देवासी 2.10 लाख, मूल ओबीसी तीन लाख, राजपूत व भोमिया 1.50 लाख, ब्राह्रमण व वैश्य सहित अन्य सवर्ण 2.40 लाख व मुस्लिम नब्बे हजार प्रमुख मतदाता है।(नोट: जातीय संख्या अनुमानित है)ऐसा रहा है जालोर-सिरोही का इतिहासजालोर लोकसभा क्षेत्र आजादी के बाद से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट थी। यहां हुए कुल 16 लोकसभा चुनाव में 8 बार कांग्रेस, 4 बार भाजपा, 1 बार स्वतंत्र पार्टी, 1 बार भारतीय लोकदल और 1 बार निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। इस लिहाज से पिछले 3 बार से जालोर सीट पर लगातार भाजपा का कब्जा है। जालोर सीट शुरू से कांग्रेस का गढ़ रहा। लेकिन 2009 के परिसीमन में इस सीट के सामान्य होने के बाद से लगातार 2 बार से भाजपा के देवजी पटेल यहां से सांसद है।4 बार बूटा ने दर्ज की जीतजालोर-सिरोही के लोगों का बाहरी प्रत्याशियों से विशेष लगाव रहा है। अब तक नौ बार यहां के लोग बाहरी प्रत्याशी को अपना प्रतिनिधि बना संसद में भेज चुके है। यहीं कारण है कि कांग्रेस के दिग्गज बूटासिंह पंजाब से यहां आकर चुनाव लड़े औरसफल रहे। वहीं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण की पत्नी वी.सुशीला भी एक बार यहां से चुनाव जीतने में सफल रही। पार्टी अध्यक्ष रहते बंगारू लक्ष्मण यहां से वर्ष 1999 में बूटासिंह के सामने पराजित हो चुके है।अब तक इन्होंने हासिल की है जीत-1952- भवानी सिंह – निर्दलीय1957 – दामिनी सूरज रतन – कांग्रेस1962 – हरीशचन्द्र माथुर – कांग्रेस1967 – डी पाटौदिया – स्वतंत्र पार्टी1971 – नरेन्द्र कुमार सांघी – कांग्रेस1977 – हुक्माराम – भारतीय लोकदल(जनता पार्टी)1980 – विरदाराम – कांग्रेस1984 – बूटासिंह – कांग्रेस1989 – कैलाश मेघवाल – भाजपा1991 – बूटासिंह – कांग्रेस1996 – परसराम मेघवाल – कांग्रेस1998 – बूटासिंह – कांग्रेस1999 – बूटासिंह – कांग्रेस2004 – वी सुशीला – भाजपा2009 – देवजी पटेल – भाजपा2014 – देवजी पटेल – भाजपा

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