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गुढ़ाचन्द्रजी :ऐतिहासिक कुण्ड की दुर्दशा

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गुढ़ाचन्द्रजी जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक उदासीनता के चलते कस्बे का ऐतिहासिक कुण्ड दो दशक से पानी की बाट जोह रहा है। बिना पानी के कुण्ड अब मृत पड़ा है। कुण्ड में पानी की जगह गंदगी पड़ी हुई है। बुजुर्गो का कहना है कि कस्बे में सैकड़ों वर्ष पहले कुण्ड का निर्माण कराया गया था। जो बारह माह लबालब भरा रहता था। लेकिन बारिश की कमी व जलस्रोत के रास्तों पर बंद होने से नकारा हो गया है। कुण्ड से पहले लोग पेयजल के लिए पानी ले जाते थे। साथ ही कुण्ड में लोग नहाने के बाद धार्मिक कार्य पूरा करते थे। कुण्ड में समीप ही बह रही नदी से जल की आवक होती थी। लेकिन जलस्रोत के बंद होने से दो दशक से कुण्ड रीता पड़ा है और तला नजर आ रहा है। आसपास की गंदगी और कचरे से जलस्रोत बंद होते गए और कुण्ड पानी को तरस गया। अब कुण्ड में पानी की जगह कचरा भरा है। इसके बावजूद ग्राम पंचायत ने इसकी सुध लेने की जहमत नहीं उठाई है। कस्बे में बस स्टेण्ड के समीप माली मोहल्ले में स्थित कुण्ड की स्थिति दिनों दिन खराब होती जा रही है। कुण्ड के समीप ही बालाजी महाराज का मंदिर सहित शिवालय स्थित है। जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते है। कुण्ड की पट्टियां क्षतिग्रस्त होने लगी है। स्थानीय नागरिक कभी-कभार इसके संरक्षण के लिए प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाते है। लेकिन इसके जीर्णोद्धार की पहल नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने जल्द ही इसकी सुध नहीं ली तो ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।आज होगा श्रमदानगुढाचन्द्रजी. राजस्थान पत्रिका के जनसरोकार कार्यक्रमों की श्रृंखला में अमृतम् जलम् अभियान के तहत यहां ऐतिहासिक कुण्ड पर रविवार सुबह ७ बजे श्रमदान किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के अलावा ग्रामीण श्रमदान करेंगे।

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