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करौली-धौलपुरऔर भरतपुर लोकसभा चुनाव सर्वे,कांग्रेस का पलड़ा भारी

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करौली-धौलपुरऔर भरतपुर लोकसभा चुनाव सर्वे

आजकलराजस्थान:भरतपुर सम्भाग की भरतपुर व करौली-धौलपुर, दोनों ही लोकसभा सीटों पर लोकसभा चुनाव2019 में कांग्रेस का पलड़ा भारी दिख रहा है। विधानसभा सीटों के हिसाब से दोनों जगह 5-5 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस मजबूत नजर आ रही है। आज भरतपुर सम्भाग में पीएम मोदी और राहुल गांधी की सभाएं हैं। 6 मई को मतदान होना है।

भरतपुर :  मुख्य मुकाबला रंजीता कोली Vs अभिजीत कुमार जमीनी हकीकत: कांग्रेस और bjp में सीधा मुकाबला है। बसपा ने इसे त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। नगर और नदबई से बसपा के दो विधायक भी जीते हुए हैं। मोदी फैक्टर को कम करने के लिए कांग्रेस के तीनों मंत्री विश्वेंद्र सिंह, सुभाष गर्ग और भजन लाल जाटव पूरी तरह से जुटे हैं। कम पढ़ी-लिखी होना, बोलने में झिझक, ससुर गंगाराम पर कबूतरबाजी के आरोपों का नुकसान भाजपा की रंजीता कोली की परेशानी बढ़ा रहे हैं।

किसका पलड़ा भारीः बयाना-रूूूपावास, कठूमर,वैर ,कामा ,व नगर में कांग्रेस का पलड़ा भारी दिख रहा है। नदबई और भरतपुर में भाजपा मजबूत है। डीग-कुम्हेर में संघर्ष की स्थिति है। अभी यहां कांग्रेस मजबूत दिख रही है। वैसे भी यहां तीन-तीन मंत्रियों की साख दांव पर लगी है। लेकिन, बसपा का असर कम कर पाना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क भाजपा के लिए राहत की बात है।

जीत का फाॅर्मूला :यहां जाटों का बड़ा वोट बैंक है। जो भी दल इन्हें अपने पक्ष में करेगा, उसकी जीत लगभग तय है। इसके बाद जाटव वोटर हैं। जाटव-मुस्लिम मेव, मीणा और खटीक वोटों का रुझान कांग्रेस की तरफ है। मेवात में तो “पहले मेव भाई, फिर कांग्रेस आई” का नारा चल रहा है। वैश्य, ब्राह्मण, राजपूत वोटों में भाजपा का पलड़ा भारी रह सकता है। लेकिन, भाजपा की कमजोरी यह है कि 8 में से एक भी विधानसभा सीट उसके पास नहीं है। यहां इस बार गुर्जर वोटों के भी बंटने की संभावना है। वैसे बसपा जितने भी वोट लेगी, वह कांग्रेस को नुकसान करेगी।

सामाजिक समीकरण

भरतपुर लोकसभा क्षेत्र संख्या 9 की बात करें तो यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है. भरतपुर जिला पूर्वी राजस्थान में स्थित ब्रज क्षेत्र का हिस्सा है, जिसकी सीमाएं उत्तर प्रदेश से लगती हैं. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की जनसंख्या 2845269 है, जिसका 81.98 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 18.02 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. वहीं कुल आबादी का 21.95 फीसदी अनुसूचित जाति और 3.19 फीसदी अनुसूचित जनजाति है. इसके साथ इ्स क्षेत्र में 77 फीसदी हिंदू और 18 फीसदी मुस्लिम आबादी है. साल 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान भरतपुर में मतदाताओं की संख्या 16,86,897 है, जिसमें 9,11,069 पुरुष और 7,75,828 महिला मतदाता हैं.

करौली-धौलपुर : मनोज राजोरिया Vs संजय जाटव

जमीनी हकीकत: सांसद को लेकर एंटी इंकमबेंसी और धौलपुर-सरमथुरा-करौली रेल लाइन, चंबल प्रोजेक्ट के मुद्दे की वजह से यहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव के पैटर्न को देखें तो पूरी लोकसभा की 8 में से भाजपा को सिर्फ 1 सीट धौलपुर ही मिली है। शहरी क्षेत्र के मतदाताओं में राष्ट्रवाद औऱ आतंकवाद की वजह से मोदी फैक्टर का खासा असर है। लेकिन, मतदाता यह भी कह रहे हैं कि विपक्ष भी मजबूत होना चाहिए।

किसका पलड़ा भारीः राजाखेड़ा, बाड़ी, बसेड़ी, टोड़ाभीम, सपोटरा में कांग्रेस व धौलपुर, हिंडौन, करौली में भाजपा मजबूत दिख रही है। यहां गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैसला और मीणा नेता डॉ. किरोड़ीलाल मीणा भाजपा को कितना फायदा दिलवा पाते हैं। यह देखने की बात होगी। मीणा वोटरों का झुकाव अभी कांग्रेस की ओर दिख रहा है। वहीं, गुर्जरों में सचिन पायलट काे मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराजगी नजर आ रही है।

जातीगत समीकरण 

इस संसदीय क्षेत्र में जाटव और बैरवा मतदाताओं की संख्या करीब चार लाख है। अगर जातीय और  क्षेतीय आधार पर मतदान हुआ तो भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। धौलपुर करौली संसदीय क्षेत्र से धौलपुर जिले के किसी भी प्रत्याशी को पहली बार कांग्रेस का  टिकट मिला है। अब तक कांग्रेस तथा भाजपा ने टिकट देने में धौलपुर जिले की उपेक्षा की है। जिले में अनुसूचित जाति के करीब पांच लाख मतदाता हैं,  जिनमें से चार लाख  जाटव और बैरवाओं के हैं। शेष एक लाख अन्य दलित जातियों के हैं। कांग्रेस का प्रत्याशी जाटव है, इसका लाभ उसे मिलने की संभावना है। यहां बैरवा भी प्रभावशाली हैं क्योंकि कांग्रेस के पूर्व सांसद खिलाड़ी लाल बैरवा करौली विधानसभा क्षेत्र के निवासी  हैं, लेकिन वह धौलपुर जिले के बसेड़ी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। लिहाजा उन्हें बैरवा समुदाय के मत मिलने की संभावना है।

जीत का फाॅर्मूला:कांग्रेस का फोकस मीणा, माली, मुस्लिम और जाटव वोटों पर ज्यादा है। भाजपा राष्ट्रवाद, मोदी फैक्टर के साथ-साथ ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत गुर्जर वोटों के जरिए कब्जा बरकरार रखने की जुगत में है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने भी यहां पूरी ताकत लगा दी है। गुर्जर वोटर निर्णायक हैं। किरोड़ी बैसला खुद करौली क्षेत्र से हैं, इसलिए ज्यादातर गुर्जर भाजपा की ओर जा सकते हैं। जाटव वोट बैंक में यहां कांग्रेस के साथ भितरघात की आशंका है। इसलिए हार-जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहने वाला है।

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